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निर्मल जीत सिंह सेखों — Class 9 Hindi

गंगा · Chapter 13

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Chapter summary

यह "साथ-साथ पढ़ें" प्रेरक जीवनी परमवीर चक्र विजेता फ्लाइंग ऑफिसर निर्मल जीत सिंह सेखों के अद्वितीय साहस और बलिदान की गाथा है। 17 जुलाई 1945 को पंजाब के लुधियाना के निकट जन्मे सेखों बचपन से ही वायुयानों के प्रति आकर्षित थे और अपने वायुसेना-अधिकारी पिता से प्रभावित थे। मैट्रिक प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण कर, इंजीनियरिंग की पढ़ाई बीच में छोड़कर उन्होंने 4 जून 1967 को भारतीय वायुसेना में नियुक्ति पाई और छोटे लड़ाकू विमान "नैट" उड़ाने में सिद्धहस्त हो गए। अपने मैत्रीपूर्ण स्वभाव के कारण सभी उन्हें प्यार से "भाई" कहते थे। 1971 के भारत-पाक युद्ध में वे श्रीनगर की वायु-सुरक्षा में तैनात थे। 14 दिसंबर 1971 को जब पाकिस्तानी वायुसेना के छह सेबर जेट फाइटरों ने श्रीनगर हवाई क्षेत्र पर हमला किया, तब सेखों अपनी जान की परवाह किए बिना अकेले नैट विमान लेकर उड़ पड़े। विषम परिस्थिति में भी उन्होंने एक विमान मार गिराया और दूसरे में आग लगा दी, फिर चार शत्रु-विमानों से अकेले लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए। मात्र 26 वर्ष की आयु में मातृभूमि की रक्षा करते हुए बलिदान देने वाले सेखों भारतीय वायुसेना के एकमात्र परमवीर चक्र विजेता हैं।
सेखों का बचपन और सपनावायुसेना में नियुक्ति1971 का युद्ध और श्रीनगरअकेले सेबर जेटों से युद्धपरमवीर चक्र और बलिदान

Key ideas & terms

निर्मल जीत सिंह सेखों
भारतीय वायुसेना के फ्लाइंग ऑफिसर एवं परमवीर चक्र विजेता, जिन्होंने 1971 के युद्ध में श्रीनगर की रक्षा करते हुए बलिदान दिया।
परमवीर चक्र
भारत का सर्वोच्च युद्धकालीन वीरता पुरस्कार; सेखों इसे पाने वाले भारतीय वायुसेना के एकमात्र नायक हैं।
नैट (Gnat)
छोटा लड़ाकू विमान, जिसे सेखों कुशलता से उड़ाते थे और जिसमें वे अकेले अनेक सेबर जेटों से भिड़े।
सेबर जेट फाइटर
पाकिस्तानी वायुसेना के एफ-86 लड़ाकू विमान, जिन्होंने 14 दिसंबर 1971 को श्रीनगर हवाई क्षेत्र पर हमला किया।
1971 का युद्ध
भारत-पाक युद्ध, जिसमें सेखों ने श्रीनगर घाटी की हवाई सुरक्षा करते हुए असाधारण वीरता दिखाई।
"फ्लाइंग बुलेट्स"
संख्या 18 स्क्वाड्रन, जिसमें अक्टूबर 1968 में सेखों फ्लाइंग ऑफिसर के रूप में शामिल हुए।

Extra questions & answers

निर्मल जीत सिंह सेखों किस क्षेत्र में आकर्षित थे और क्यों?

वे बचपन से वायुयानों और आसमान की ओर आकर्षित थे; उनका गाँव हलवारा एयरफोर्स स्टेशन के पास था और उनके पिता भी भारतीय वायुसेना में थे।

सेखों ने वायुसेना में आने के लिए क्या किया?

मैट्रिक प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने भारतीय वायुसेना में शामिल होने के सपने को साकार करने के लिए इंजीनियरिंग की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी।

सेखों को सभी "भाई" क्यों कहते थे?

अपने उदार और मैत्रीपूर्ण स्वभाव के कारण उन्हें सभी प्यार से "भाई" कहकर पुकारते थे।

1971 के युद्ध में सेखों कहाँ तैनात थे?

वे कश्मीर घाटी की सुरक्षा के लिए श्रीनगर में नैट स्क्वाड्रन की टुकड़ी में तैनात थे, जहाँ उन्होंने भयानक ठंड में पाकिस्तानी हमलों का मुँहतोड़ जवाब दिया।

14 दिसंबर 1971 को क्या हुआ?

उस दिन पाकिस्तान के छह सेबर जेट फाइटरों ने श्रीनगर हवाई क्षेत्र पर हमला किया; रेडिनेस ड्यूटी पर तैनात सेखों तुरंत नैट विमान लेकर उड़ पड़े।

सेखों ने हवाई युद्ध में क्या उपलब्धि दिखाई?

उन्होंने अकेले ही एक सेबर एयरक्राफ्ट मार गिराया और दूसरे को आग के हवाले कर दिया, तथा "मैं उन्हें भागने नहीं दूँगा" कहते हुए शत्रु-विमानों को घेर लिया।

सेखों की वीरगति किस प्रकार हुई?

एक के विरुद्ध चार सेबर विमानों से वृक्ष जितनी ऊँचाई पर लड़ते हुए, अंत में अधिक संख्या के आगे उनका विमान गिरकर ध्वस्त हो गया और वे वीरगति को प्राप्त हुए।

सेखों को किस सम्मान से सम्मानित किया गया?

उन्हें भारत के सर्वोच्च युद्धकालीन वीरता पुरस्कार "परमवीर चक्र" से सम्मानित किया गया; वे यह पाने वाले वायुसेना के एकमात्र नायक हैं।

सेखों की स्मृति को किस प्रकार सम्मानित किया गया है?

उनके सम्मान में विशेष डाक आवरण और डाक टिकट जारी किए गए, लुधियाना और पालम एयरफोर्स म्यूज़ियम में नैट विमान के साथ उनकी प्रतिमा लगाई गई।

सेखों का जीवन किनके लिए प्रेरणा-स्रोत है?

उनका अभूतपूर्व उड़ान-कौशल और विषम परिस्थितियों में किया गया असाधारण कार्य हवाई-युद्ध-कौशल में प्रवीण होना चाहने वाले सभी लोगों के लिए प्रेरणा-स्रोत है।