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दो बैलों की कथा — Class 9 Hindi

गंगा · Chapter 1

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Chapter summary

प्रेमचंद की यह कहानी झूरी किसान के दो बैलों — हीरा और मोती — के गहरे भाईचारे और स्वतंत्रता के संघर्ष की मार्मिक गाथा है। झूरी इन बैलों को अपने साले गया के पास भेज देता है, पर अपमान और रूखे व्यवहार से दुखी होकर दोनों रस्सी तोड़कर घर लौट आते हैं। बार-बार उन्हें लौटाया जाता है, मारा जाता है और सूखा भूसा दिया जाता है, फिर भी वे अपना धर्म नहीं छोड़ते। एक छोटी अनाथ लड़की उन्हें रोटी खिलाकर स्नेह देती है। बैल साँड़ से वीरतापूर्वक लड़ते हैं, काँजीहौस में बंद होते हैं और भूख सहते हैं, पर दीवार तोड़कर अनेक पशुओं को मुक्त करा देते हैं। अंत में नीलाम होकर एक दढ़ियल कसाई के साथ जाते समय वे परिचित रास्ता पहचानकर सीधे झूरी के घर लौट आते हैं। कहानी पशु-प्रेम के साथ-साथ यह भी बताती है कि स्वतंत्रता सहज नहीं मिलती, उसके लिए बार-बार संघर्ष करना पड़ता है। परोक्ष रूप से यह कहानी पराधीन भारत के स्वतंत्रता-संग्राम की भावना से जुड़ी है।
हीरा-मोती की मित्रतागया के यहाँ अपमान और विद्रोहसाँड़ से युद्धकाँजीहौस और मुक्तिस्वतंत्रता-संग्राम का रूपक

Key ideas & terms

हीरा-मोती
झूरी के दो पछाईं नस्ल के बैल, जो परस्पर अभिन्न मित्र हैं और एकता तथा स्वाभिमान के प्रतीक हैं।
मूक-भाषा
बिना शब्दों के संकेतों एवं भावों द्वारा बैलों के बीच होने वाला संवाद, जिससे लेखक उन्हें मानवीय चेतना प्रदान करता है।
गया
झूरी का साला, जो बैलों के प्रति कठोर व्यवहार करता है और उन्हें मारता-जोतता है।
काँजीहौस
मवेशीखाना, जहाँ आवारा पशुओं को बंद किया जाता है; कहानी में यह जेल और दमन का प्रतीक बनता है।
प्रतीकात्मकता
बैल पराधीन भारतीयों के और कसाई/अंग्रेज़ी सत्ता के प्रतीक हैं — कहानी स्वतंत्रता-संग्राम का रूपक है।
स्वतंत्रता-संघर्ष
अत्याचार सहते हुए भी अपना धर्म न छोड़ना और मुक्ति के लिए बार-बार प्रयास करना — कहानी का केंद्रीय संदेश।

Extra questions & answers

हीरा और मोती का आपसी संबंध किस गुण को दर्शाता है?

उनका संबंध एकता, सहयोग और परस्पर त्याग का परिचायक है; वे विपत्ति में भी एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ते।

बैलों ने गया के यहाँ काम करने से इनकार क्यों किया?

मालिक द्वारा बेच दिए जाने को उन्होंने अपना अपमान समझा और नए स्थान को अपना घर न मानकर विरोध स्वरूप काम नहीं किया।

छोटी लड़की का बैलों के जीवन में क्या महत्त्व है?

सौतेली माँ से पीड़ित वह अनाथ लड़की रात को बैलों को रोटियाँ खिलाती है; उसका स्नेह उन्हें भावनात्मक संबल देता है और एक बार रस्सी खोलकर भागने में मदद भी करती है।

काँजीहौस में हीरा-मोती ने क्या किया?

भूख से व्याकुल होकर भी उन्होंने दीवार तोड़ दी और घोड़ियों, बकरियों, भैंसों तथा गधों को मुक्त करा दिया, यद्यपि इसके लिए उन्हें मार खानी पड़ी।

मोती और हीरा के स्वभाव में क्या अंतर है?

हीरा अधिक सहनशील, धैर्यवान और विवेकी है, जबकि मोती गुस्सैल, साहसी और विद्रोही है; दोनों के गुण एक-दूसरे के पूरक हैं।

साँड़ वाले प्रसंग से क्या सिद्ध होता है?

दोनों मित्र संगठित होकर अपने से कहीं बलवान साँड़ को हरा देते हैं, जिससे यह सिद्ध होता है कि एकता और मिलकर किया गया संघर्ष विजय दिलाता है।

कहानी का स्वतंत्रता-आंदोलन से क्या संबंध है?

बैल पराधीन भारतीय जनता के प्रतीक हैं जो अत्याचार सहते हुए भी स्वाभिमान नहीं छोड़ते; "जोर तो मारता ही जाऊँगा" जैसे कथन संघर्ष की भावना को दर्शाते हैं।

हीरा गिरे हुए साँड़ पर सींग चलाने से क्यों मना करता है?

वह मानता है कि गिरे हुए शत्रु पर वार करना धर्म-विरुद्ध है; यह भारतीय नैतिक मूल्यों और मर्यादा का परिचायक है।

कहानी के अंत में बैलों का घर लौटना क्या दर्शाता है?

यह दर्शाता है कि अपनापन और घर की ममता कितनी प्रबल होती है; नीलाम होने पर भी वे परिचित रास्ता पहचानकर झूरी के पास लौट आते हैं और मालकिन उनके माथे चूम लेती है।

प्रेमचंद ने बैलों को मानवीय चेतना क्यों दी?

मूक-भाषा और संवादों के माध्यम से लेखक ने पशुओं में स्नेह, स्वाभिमान, मित्रता और विद्रोह जैसे मानवीय भाव दिखाकर कहानी को रोचक और संदेशपरक बनाया है।