पेड़ की बात
Class 6 Hindi · मल्हार · Chapter 13
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The story in short
महान वैज्ञानिक जगदीशचंद्र बसु का यह लेख (शंकर सेन द्वारा बांग्ला से अनूदित) सरल और साहित्यिक भाषा में पेड़-पौधों के जीवन की रोचक कहानी बताता है। बीज मिट्टी के नीचे बहुत दिनों तक पड़ा रहता है; वसंत के बाद वर्षा होते ही उसका ढक्कन दरक जाता है और अंकुर बाहर निकलता है — एक भाग जड़ बनकर नीचे माटी में गड़ता है और दूसरा भाग तना बनकर ऊपर उठता है। लेखक प्रयोग से दिखाते हैं कि पौधे को चाहे जैसे रखो, जड़ सदा नीचे और तना सदा प्रकाश की ओर ऊपर बढ़ता है। पेड़-पौधे जड़ों से मिट्टी का रस और पत्तों से हवा का आहार ग्रहण करते हैं। पत्तों में अनगिनत सूक्ष्म मुँह होते हैं जो सूर्य के प्रकाश की सहायता से "अंगारक" (कार्बन डाइऑक्साइड) से कार्बन ग्रहण कर हवा को शुद्ध कर देते हैं — इस प्रकार पेड़ जीव-जंतुओं के मित्र हैं। प्रकाश ही जीवन का मूल मंत्र है, क्योंकि सूर्य-किरण के स्पर्श से ही पेड़ पल्लवित होते हैं और सारी हरियाली प्रकाश हथियाने के जाल हैं। मरने से पहले हर पेड़ बीज रूपी संतान छोड़ जाता है; फूल और पराग-कण के माध्यम से बीज पकता है। माँ की ममता के समान वृक्ष अपना सारा रस संतान-रूपी बीज को देकर सूख जाता है और अंत में जड़ सहित गिर पड़ता है। लेख विज्ञान और संवेदना का सुंदर मेल है।


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