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Class 6 Hindi · मल्हार · Chapter 10
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The story in short
कथा-सम्राट प्रेमचंद की यह कहानी सच्चे गुण और दिखावे के अंतर को उजागर करती है। देवगढ़ रियासत के बूढ़े और अनुभवी दीवान सरदार सुजानसिंह अवस्था ढल जाने पर पद छोड़ना चाहते हैं, पर राजा शर्त रखते हैं कि नया योग्य दीवान वे स्वयं खोजें। समाचार-पत्रों में विज्ञापन निकलता है कि देवगढ़ को एक सुयोग्य दीवान चाहिए — विद्या से अधिक कर्तव्य और चरित्र देखा जाएगा, तथा एक महीने तक उम्मीदवारों के आचार-विचार की परीक्षा होगी। सैकड़ों उम्मीदवार आते हैं और सब बनावटी ढंग से स्वयं को अच्छा दिखाने की कोशिश करते हैं। एक दिन हॉकी का खेल होता है; खेल के बाद एक किसान अनाज से लदी गाड़ी नाले की चढ़ाई पर फँसा देखा जाता है। अधिकांश खिलाड़ी स्वार्थ और घमंड में उसकी उपेक्षा कर देते हैं, परंतु एक युवक — जिसके पैर में चोट लगी है — रुककर अपना कोट उतारता है और कीचड़ में फँसकर भी गाड़ी को धकेलकर ऊपर चढ़ा देता है। वह किसान वास्तव में स्वयं सरदार सुजानसिंह थे, जो वेश बदलकर उम्मीदवारों की असली परीक्षा ले रहे थे। अंत में दरबार में पंडित जानकीनाथ को दीवान चुना जाता है, क्योंकि उन्हीं के हृदय में दया और आत्मबल दोनों थे। कहानी का संदेश है कि सच्चे गुण दिखावे से नहीं, कर्म से प्रकट होते हैं।


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