श्यामनारायण पाण्डेय की यह वीर-रस से ओत-प्रोत कविता उनकी प्रसिद्ध काव्य-कृति "हल्दीघाटी" का एक अंश है, जिसमें महाराणा प्रताप के अद्भुत घोड़े चेतक की वीरता और फुर्ती का सजीव चित्रण है। युद्धभूमि के बीच चौकड़ी भरता हुआ चेतक इतना निराला हो उठता है कि हवा को भी पीछे छोड़ देता है, मानो हवा से उसकी होड़ लगी हो। वह कभी शत्रुओं के सिर के ऊपर से, तो कभी आसमान में दौड़ता-सा प्रतीत होता है। उसकी फुर्ती ऐसी है कि जैसे ही राणा की लगाम ज़रा-सी हिलती है, वह सवार को लेकर उड़ जाता है, और राणा की निगाह घूमने से पहले ही वह उस ओर मुड़ जाता है — मानो वह सवार का मन समझ लेता हो। चेतक भालों, ढालों और तलवारों के बीच निर्भय होकर सरपट दौड़ता है। वह कभी यहाँ तो कभी वहाँ, ऐसी कोई जगह नहीं जहाँ वह न पहुँचा हो। बढ़ती नदी की लहर के समान वह आगे बढ़ता और विकराल वज्रमय बादल के समान शत्रु-सेना पर टूट पड़ता है। उसकी टापों से शत्रुओं के शरीर बिंध जाते, भाले और तरकश गिर पड़ते हैं और वैरी-सेना घोड़े का यह रूप देखकर दंग रह जाती है। कविता ओज, गति और चित्रात्मकता के कारण वीर-रस का उत्कृष्ट उदाहरण है।
The story in 6 beats
1कवि बताता है कि रणभूमि में चेतक बहुत निराला और हवा से भी तेज दौड़ता है।
2चेतक इतना समझदार है कि राणा की हल्की लगाम-हरकत पर ही तुरंत मुड़ जाता है।
3वह भालों, ढालों और करवालों के बीच निर्भीक होकर अपनी चालों का कौशल दिखाता है।
4कवि कहता है कि चेतक हर जगह दिखाई देता है, जैसे वह शत्रुओं के सिरों पर उड़ रहा हो।
5फिर वह बढ़ती नदी और विकराल वज्र-मय बादल की तरह शत्रु-सेना पर टूट पड़ता है।
6उसकी टापों से हथियार और अंग बिखरते हैं और वैरी-समाज उसका रंग देखकर दंग रह जाता है।
वीर रसचेतक की वीरतामहाराणा प्रतापहल्दीघाटीओज और गति
Characters & key ideas
चचेतकमहाराणा प्रताप का अत्यंत वीर, फुर्तीला और स्वामिभक्त घोड़ा, जिसकी वीरता का इस कविता में वर्णन है।
ममहाराणा प्रतापमेवाड़ के वीर शासक, जिन्होंने हल्दीघाटी के युद्ध में स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया।
ववीर रसयुद्ध, पराक्रम और उत्साह के भाव से उत्पन्न होने वाला रस।
हहल्दीघाटीश्यामनारायण पाण्डेय की प्रसिद्ध काव्य-कृति, जिससे यह अंश लिया गया है।
अअरि-मस्तकशत्रु का सिर या माथा।
ततुकांतवह काव्य-शैली जिसमें पंक्तियों के अंतिम शब्दों की ध्वनि मिलती-जुलती हो (जैसे निराला-पाला, कोड़ा-घोड़ा)।
Word meanings · शब्दार्थ
रण-बीच
युद्ध के बीच
चौकड़ी
घोड़े की तेज उछलती चाल
अरि-मस्तक
शत्रु का सिर
बाग
लगाम
सवार
घोड़े पर बैठा व्यक्ति
मड़ु जाता था
मुड़ जाता था
करवालों
तलवारों
विकराल
बहुत भयानक
बज्र-मय
वज्र जैसा कठोर
निषंग
तरकश
हय-टापों
घोड़े के खुरों की चोट
वैरी-समाज
शत्रुओं का समूह
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चेतक की वीरता
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