संज्ञा एवं परिभाषा — Class 10 Sanskrit
व्याकरणवीथिः · Chapter 2
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- लेखन प्रारूप
Chapter summary
Key ideas & terms
- संज्ञा
- व्याकरण का पारिभाषिक शब्द/नाम।
- गुणः
- अ, ए, ओ — ये गुण संज्ञक स्वर हैं।
- वृद्धिः
- आ, ऐ, औ — ये वृद्धि संज्ञक स्वर हैं।
- सवर्णः
- समान उच्चारण-स्थान और प्रयत्न वाले वर्ण।
- संयोगः
- बिना स्वर के दो या अधिक व्यंजनों का मेल।
- परिभाषा
- किसी संज्ञा का स्पष्ट अर्थ बताने वाला नियम।
Extra questions & answers
व्याकरण में ‘संज्ञा’ का क्या अर्थ है?
व्याकरण में संज्ञा का अर्थ है पारिभाषिक शब्द या नाम, जैसे गुण, वृद्धि, सवर्ण आदि।
‘गुण’ संज्ञक स्वर कौन-से हैं?
अ, ए और ओ — ये तीन गुण संज्ञक स्वर हैं।
‘वृद्धि’ संज्ञक स्वर कौन-से हैं?
आ, ऐ और औ — ये तीन वृद्धि संज्ञक स्वर हैं।
सवर्ण किसे कहते हैं?
जिन वर्णों का उच्चारण-स्थान और प्रयत्न समान हो, उन्हें परस्पर सवर्ण कहते हैं, जैसे अ और आ।
संयोग किसे कहते हैं?
बीच में स्वर के बिना दो या अधिक व्यंजनों के मेल को संयोग कहते हैं, जैसे ‘क्त’ में क् + त।
ह्रस्व, दीर्घ और प्लुत क्या हैं?
एक मात्रा वाला स्वर ह्रस्व, दो मात्रा वाला दीर्घ और तीन मात्रा वाला प्लुत कहलाता है।
इन परिभाषाओं को जानना क्यों आवश्यक है?
क्योंकि सन्धि, प्रत्यय और अन्य नियम इन्हीं संज्ञाओं के आधार पर बताए जाते हैं।
‘परिभाषा’ का व्याकरण में क्या प्रयोजन है?
परिभाषा किसी संज्ञा या नियम का स्पष्ट अर्थ बताकर व्याकरण को संक्षिप्त और सुगम बनाती है।
गुण और वृद्धि का प्रयोग कहाँ होता है?
सन्धि और प्रत्यय के नियमों में, जहाँ स्वरों में गुण या वृद्धि का परिवर्तन होता है।
यह अध्याय व्याकरण में किस प्रकार सहायक है?
यह व्याकरण की मूल शब्दावली देकर शेष व्याकरण को समझना सरल बनाता है।


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