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धातुरूप-सामान्य-परिचयः — Class 10 Sanskrit

व्याकरणवीथिः · Chapter 5

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Chapter summary

क्रिया के मूल को धातु कहते हैं, और काल, पुरुष तथा वचन के अनुसार धातु से बने रूपों को ‘धातुरूप’ कहते हैं। संस्कृत में क्रिया के रूप मुख्यतः पाँच लकारों में चलते हैं — लट् (वर्तमान काल), लङ् (भूत काल/अनद्यतन), लृट् (भविष्यत् काल), लोट् (आज्ञा) और विधिलिङ् (चाहिए/सम्भावना)। प्रत्येक लकार में तीन पुरुष होते हैं — प्रथम पुरुष, मध्यम पुरुष और उत्तम पुरुष — तथा तीन वचन। उदाहरणतः ‘पठ्’ (पढ़ना) धातु के लट् लकार में रूप बनते हैं — पठति, पठतः, पठन्ति (प्रथम पुरुष); पठसि, पठथः, पठथ (मध्यम पुरुष); पठामि, पठावः, पठामः (उत्तम पुरुष)। इसी प्रकार ‘गम्’, ‘भू’, ‘हस्’ आदि धातुओं के रूप भी चलते हैं। धातुरूपों के अभ्यास से क्रिया का सही प्रयोग और वाक्य-रचना सीखी जाती है।
धातु और लकारलट्, लङ्, लृट्लोट् और विधिलिङ्पुरुष और वचनपठ्/गम्/भू के रूप

Key ideas & terms

धातुः
क्रिया का मूल रूप (जैसे पठ्, गम्, भू)।
धातुरूपम्
लकार, पुरुष और वचन के अनुसार बने क्रिया-रूप।
लट् लकारः
वर्तमान काल का लकार (पठति)।
लृट् लकारः
भविष्यत् काल का लकार (पठिष्यति)।
लोट् लकारः
आज्ञा-सूचक लकार (पठतु)।
पुरुषः
प्रथम, मध्यम और उत्तम पुरुष।

Extra questions & answers

धातु किसे कहते हैं?

क्रिया के मूल रूप को धातु कहते हैं, जैसे पठ् (पढ़ना), गम् (जाना), भू (होना)।

धातुरूप किसे कहते हैं?

काल (लकार), पुरुष और वचन के अनुसार धातु से बने रूपों को धातुरूप कहते हैं।

संस्कृत में मुख्य लकार कौन-से हैं?

लट् (वर्तमान), लङ् (भूत), लृट् (भविष्यत्), लोट् (आज्ञा) और विधिलिङ् (चाहिए/सम्भावना)।

‘पठ्’ धातु के लट् लकार प्रथम पुरुष के तीनों रूप लिखिए।

पठति, पठतः, पठन्ति।

‘पठ्’ धातु के लट् लकार उत्तम पुरुष के रूप लिखिए।

पठामि, पठावः, पठामः।

लट् लकार किस काल का बोध कराता है?

लट् लकार वर्तमान काल का बोध कराता है।

लोट् लकार का क्या प्रयोग है?

लोट् लकार आज्ञा, प्रार्थना या अनुमति के अर्थ में प्रयुक्त होता है (जैसे पठतु = वह पढ़े)।

विधिलिङ् लकार का क्या अर्थ है?

यह ‘चाहिए’, सम्भावना या विधि के अर्थ में प्रयुक्त होता है (जैसे पठेत् = पढ़ना चाहिए)।

पुरुष कितने होते हैं और कौन-से?

तीन — प्रथम पुरुष, मध्यम पुरुष और उत्तम पुरुष।

धातुरूपों के अभ्यास से क्या लाभ है?

क्रिया का सही काल और पुरुष में प्रयोग तथा शुद्ध वाक्य-रचना सीखी जाती है।

अभ्यासकार्यम्

प्र. 1. कोष्ठके प्रदत्तधातोः निर्दिष्टलकारे समुचितप्रयोगेण वाक्यानि पूरयत— i) बालकाः पुस्तकानि ......................... । (पठ्-लट्)

बालकाः पुस्तकानि पठन्ति।

ii) पुस्तकानि पठित्वा ते विद्वांसः ......................... । (भू-लृट्)

पुस्तकानि पठित्वा ते विद्वांसः भविष्यन्ति।

iii) यूयम् उद्याने कदा ......................... । (क्रीड्-लङ्)

यूयम् उद्याने कदा अक्रीडत।

iv) किम् आवाम् अद्य ......................... । (भ्रम्-लोट्)

किम् आवाम् अद्य भ्रमाव।

v) त्वम् ध्यानेन पाठं ......................... । (पठ्-विधिलिङ्)

त्वं ध्यानेन पाठं पठेः।

vi) साधवः तपः ......................... । (तप्-लट्)

साधवः तपः तपन्ति।

vii) वयम् उत्तमान् अङ्कान् ......................... । (लभ्-लृट्)

वयम् उत्तमान् अङ्कान् लप्स्यामहे।

viii) नाटकं दृष्ट्वा सर्वे ......................... । (मुद्-लङ्)

नाटकं दृष्ट्वा सर्वे अमोदन्त।

ix) पितरं वार्धक्ये पुत्रः अवश्यं ......................... । (सेव्-लोट्)

पितरं वार्धक्ये पुत्रः अवश्यं सेवताम्।

x) हे प्रभो! संसारे कोऽपि भिक्षां न ......................... । (याच्-विधिलिङ्)

हे प्रभो! संसारे कोऽपि भिक्षां न याचेत्।

प्र. 2. कोष्ठकात् समुचितं क्रियापदं चित्वा वाक्यानि पूरयत— i) अद्य युवाम् विद्यालयं किमर्थं न .........................? (अगच्छताम्/अगच्छतम्/अगच्छत)

अद्य युवाम् विद्यालयं किमर्थं न अगच्छतम्?

ii) पुरा जनाः संस्कृतभाषया ......................... । (भाषन्ते/भाषामहे/अभाषन्त)

पुरा जनाः संस्कृतभाषया अभाषन्त।

iii) यूयं कं पाठम् ......................... ? (अपठत/अपठत/अपठन्)

यूयं कं पाठम् अपठत?

iv) जीवाः सर्वेऽत्र ......................... भावयन्तः परस्परम्। (मोदताम्/मोदेताम्/मोदन्ताम्)

जीवाः सर्वेऽत्र मोदन्ताम् भावयन्तः परस्परम्।

v) कक्षायाम् सर्वे ध्यानेन ......................... । (पठतु/पठताम्/पठन्तु)

कक्षायाम् सर्वे ध्यानेन पठन्तु।

vi) प्रभो मह्यम् बुद्धिम् ......................... । (यच्छ/यच्छतम्/यच्छत)

प्रभो मह्यं बुद्धिं यच्छ।

vii) वयं सदैव सुधीराः सुवीराः च ......................... । (भवेव/भवेम/भवेयम्)

वयं सदैव सुधीराः सुवीराः च भवेम।

viii) त्वं सायं कुत्र ......................... ? (गमिष्यसि/गमिष्यथः/गमिष्यथ)

त्वं सायं कुत्र गमिष्यसि?

ix) विद्वान् सर्वत्र ......................... । (पूज्यन्ते/पूज्येते/पूज्यते)

विद्वान् सर्वत्र पूज्यते।

x) अद्यत्वे समाचारपत्रस्य महत्त्वं सर्वे ......................... । (जानाति/जानन्ति/जानासि)

अद्यत्वे समाचारपत्रस्य महत्त्वं सर्वे जानन्ति।