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समास-परिचयः — Class 10 Sanskrit

व्याकरणवीथिः · Chapter 9

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Chapter summary

दो या अधिक पदों के परस्पर मेल से बने एक संक्षिप्त पद को समास कहते हैं, और समस्त पद को अलग-अलग करके दिखाने को विग्रह कहते हैं। समास के चार मुख्य भेद हैं। अव्ययीभाव समास में पहला पद अव्यय और प्रधान होता है (उप + कृष्णम् = उपकृष्णम् = कृष्ण के समीप)। तत्पुरुष समास में उत्तर (दूसरा) पद प्रधान होता है (राज्ञः पुरुषः = राजपुरुषः); इसके उपभेद कर्मधारय (नीलम् कमलम् = नीलकमलम्) और द्विगु (त्रयाणां लोकानां समाहारः = त्रिलोकी) हैं। द्वन्द्व समास में दोनों पद प्रधान होते हैं (रामश्च लक्ष्मणश्च = रामलक्ष्मणौ)। बहुव्रीहि समास में दोनों पद गौण होकर किसी अन्य का बोध कराते हैं (पीतम् अम्बरं यस्य सः = पीताम्बरः = कृष्ण)। समास से भाषा संक्षिप्त और सुंदर बनती है, और परीक्षा में समास तथा विग्रह महत्त्वपूर्ण हैं।
समास और विग्रहअव्ययीभाव समासतत्पुरुष, कर्मधारय, द्विगुद्वन्द्व समासबहुव्रीहि समास

Key ideas & terms

समासः
दो या अधिक पदों के मेल से बना संक्षिप्त पद।
विग्रहः
समस्त पद को अलग-अलग करके दिखाना।
अव्ययीभावः
पहला (अव्यय) पद प्रधान होने वाला समास।
तत्पुरुषः
उत्तर पद प्रधान होने वाला समास।
द्वन्द्वः
दोनों पद प्रधान होने वाला समास।
बहुव्रीहिः
दोनों पद गौण होकर अन्य का बोध कराने वाला समास।

Extra questions & answers

समास किसे कहते हैं?

दो या अधिक पदों के परस्पर मेल से बने एक संक्षिप्त पद को समास कहते हैं।

विग्रह किसे कहते हैं?

समस्त (मिले हुए) पद को अलग-अलग पदों में खोलकर दिखाने को विग्रह कहते हैं।

समास के चार मुख्य भेद कौन-से हैं?

अव्ययीभाव, तत्पुरुष, द्वन्द्व और बहुव्रीहि।

तत्पुरुष समास में कौन-सा पद प्रधान होता है? उदाहरण दीजिए।

उत्तर (दूसरा) पद प्रधान होता है; जैसे राज्ञः पुरुषः = राजपुरुषः।

कर्मधारय समास का एक उदाहरण दीजिए।

नीलम् कमलम् = नीलकमलम् (यह तत्पुरुष का उपभेद है)।

द्विगु समास का एक उदाहरण दीजिए।

त्रयाणां लोकानां समाहारः = त्रिलोकी (संख्या-पूर्वक समास)।

द्वन्द्व समास में पदों की क्या स्थिति होती है? उदाहरण दीजिए।

दोनों पद प्रधान होते हैं; जैसे रामश्च लक्ष्मणश्च = रामलक्ष्मणौ।

बहुव्रीहि समास की क्या विशेषता है? उदाहरण दीजिए।

इसमें दोनों पद गौण होकर किसी तीसरे का बोध कराते हैं; जैसे पीताम्बरः = पीला वस्त्र जिसका है, अर्थात कृष्ण।

अव्ययीभाव समास में कौन-सा पद प्रधान होता है?

पहला (पूर्व) पद, जो प्रायः अव्यय होता है, प्रधान होता है; जैसे उपकृष्णम्।

समास का प्रयोग करने से क्या लाभ है?

समास से भाषा संक्षिप्त, सुगठित और सुंदर बनती है।

अभ्यासकार्यम्

प्र. 1. उदाहरणमनुसृत्य रिक्तस्थानानां पूर्तिः कोष्ठकात् समुचितैः समस्तपदैः कुरुत—
i) ................ जनः नित्यकर्म कृत्वा प्रातराशं करोति। (विशालवक्षः/ सुप्तोत्थितः)

सुप्तोत्थितः जनः नित्यकर्म कृत्वा प्रातराशं करोति।

ii) त्रयाणां लोकानां समाहारः ................. इति कथ्यते। (त्रिलोकी/ त्रिलोकम्)

त्रयाणां लोकानां समाहारः त्रिलोकी इति कथ्यते।

iii) ऋषेः आश्रमः ................. अस्ति। (प्रतिगृहम्/ उपगङ्गम्)

ऋषेः आश्रमः उपगङ्गम् अस्ति।

iv) तव ................. मलिनम् अस्ति। (पाणिपादाः/ पाणिपादम्)

तव पाणिपादम् मलिनम् अस्ति।

v) ................. सैनिकः व्रणयुक्तः जातः। (स्वर्गपतितः/ अश्वपतितः)

अश्वपतितः सैनिकः व्रणयुक्तः जातः।

vi) ................. जीवनस्य उद्देश्याः सन्ति। (धर्मार्थकाममोक्षं/ धर्मार्थकाममोक्षाः)

धर्मार्थकाममोक्षाः जीवनस्य उद्देश्याः सन्ति।

प्र. 2. अधोलिखितवाक्येषु स्थूलपदानि आश्रित्य समस्तपदं विग्रहं वा लिखत—
i) शरणम् आगतः तु सदैव रक्षणीयः।

शरणागतः।

ii) विद्यया हीनः छात्रः न शोभते।

विद्याहीनः।

iii) असत्यं तु त्याज्यं भवति।

न सत्यम्।

iv) रामः महाराजः आसीत्।

महान् च असौ राजा।

v) सीता च रामः च वनम् अगच्छताम्।

सीतारामौ।

vi) तडागः नीलोत्पलैः सुशोभते।

नीलम् उत्पलम्।

प्र. 3. उदाहरणानि पठित्वा तदनुसारं विग्रहं समासनामानि च लिखत।
i) ब्राह्मणौ

ब्राह्मणश्च ब्राह्मणश्च — ब्राह्मणौ (एकशेष)।

ii) सुखदुःखम्

सुखं च दुःखं च तयोः समाहारः — सुखदुःखम् (समाहार द्वन्द्व)।

iii) शिरोग्रीवम्

शिरश्च ग्रीवा च तयोः समाहारः — शिरोग्रीवम् (समाहार द्वन्द्व)।

iv) रामलक्ष्मणभरताः

रामश्च लक्ष्मणश्च भरतश्च — रामलक्ष्मणभरताः (इतरेतर द्वन्द्व)।

v) अजौ

अजश्च अजा च — अजौ (एकशेष)।

vi) बालकाः

बालकश्च बालकश्च बालकश्च — बालकाः (एकशेष)।

vii) शास्त्रप्रवीणः

शास्त्रे प्रवीणः — शास्त्रप्रवीणः (सप्तमी तत्पुरुष)।

viii) नरसिंहः

नरः सिंह इव — नरसिंहः (कर्मधारय)।

ix) प्रत्यक्षम्

अक्ष्णोः प्रति — प्रत्यक्षम् (अव्ययीभाव)।

x) दशाननः

दश आननानि यस्य सः — दशाननः (बहुव्रीहि)।

प्र. 4. अधोलिखितवाक्येषु समस्तपदं चित्वा तस्य विग्रहं लिखत—
i) विष्णुः पीताम्बरं धारयति।

पीताम्बरम् — पीतम् अम्बरम्।

ii) भवतः कार्यं निर्विघ्नं समापयेत्।

निर्विघ्नम् — विघ्नानाम् अभावः।

iii) दुर्गासप्तशती पठितव्या।

सप्तशती — सप्तानां शतानां समाहारः।

iv) शरविद्धः हंसः भूमौ पतितः।

शरविद्धः — शरेण विद्धः।

v) वृद्धः पुत्रपौत्रम् दृष्ट्वा प्रसीदति।

पुत्रपौत्रम् — पुत्रश्च पौत्रश्च तयोः समाहारः।

vi) विष्णुः चक्रपाणिः कथ्यते।

चक्रपाणिः — चक्रं पाणौ यस्य सः।