दो या अधिक पदों के परस्पर मेल से बने एक संक्षिप्त पद को समास कहते हैं, और समस्त पद को अलग-अलग करके दिखाने को विग्रह कहते हैं। समास के चार मुख्य भेद हैं। अव्ययीभाव समास में पहला पद अव्यय और प्रधान होता है (उप + कृष्णम् = उपकृष्णम् = कृष्ण के समीप)। तत्पुरुष समास में उत्तर (दूसरा) पद प्रधान होता है (राज्ञः पुरुषः = राजपुरुषः); इसके उपभेद कर्मधारय (नीलम् कमलम् = नीलकमलम्) और द्विगु (त्रयाणां लोकानां समाहारः = त्रिलोकी) हैं। द्वन्द्व समास में दोनों पद प्रधान होते हैं (रामश्च लक्ष्मणश्च = रामलक्ष्मणौ)। बहुव्रीहि समास में दोनों पद गौण होकर किसी अन्य का बोध कराते हैं (पीतम् अम्बरं यस्य सः = पीताम्बरः = कृष्ण)। समास से भाषा संक्षिप्त और सुंदर बनती है, और परीक्षा में समास तथा विग्रह महत्त्वपूर्ण हैं।
समास और विग्रहअव्ययीभाव समासतत्पुरुष, कर्मधारय, द्विगुद्वन्द्व समासबहुव्रीहि समास
Characters & key ideas
ससमासःदो या अधिक पदों के मेल से बना संक्षिप्त पद।
वविग्रहःसमस्त पद को अलग-अलग करके दिखाना।
अअव्ययीभावःपहला (अव्यय) पद प्रधान होने वाला समास।
ततत्पुरुषःउत्तर पद प्रधान होने वाला समास।
दद्वन्द्वःदोनों पद प्रधान होने वाला समास।
बबहुव्रीहिःदोनों पद गौण होकर अन्य का बोध कराने वाला समास।
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