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आदमी का अनुपात — Class 8 Hindi

मल्हार · Chapter 9

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Chapter summary

गिरिजा कुमार माथुर की यह विचारपूर्ण कविता मनुष्य की लघुता (छोटेपन) और ब्रह्मांड की विराटता के अनुपात को दर्शाती है तथा मानव के अहंकार पर तीखा व्यंग्य करती है। कवि छोटे से बड़े की ओर क्रमशः विस्तार दिखाते हैं — दो व्यक्ति कमरे में, कमरा घर में, घर मोहल्ले में, मोहल्ला नगर में, नगर प्रदेश में, प्रदेश देश में, देश पृथ्वी पर, पृथ्वी अनगिनत नक्षत्रों में एक छोटा ग्रह, और ऐसे लाखों ब्रह्मांडों में अपना एक ब्रह्मांड। इस विराट सृष्टि की तुलना में मनुष्य अत्यंत सूक्ष्म है। फिर भी मनुष्य इतना छोटा होते हुए भी ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा और अविश्वास में लीन रहता है, संख्यातीत (असंख्य) शंख जैसी ऊँची दीवारें खड़ी कर लेता है, स्वयं को दूसरे का स्वामी बताता है और एक ही कमरे में दो अलग दुनिया रच लेता है। कवि बिना क्रोध दिखाए, करुणा और चिंता के साथ मनुष्य को उसकी सीमाओं और कमियों का बोध कराते हैं। कविता का संदेश है कि मनुष्य को अपने छोटेपन को समझकर अहंकार त्यागना चाहिए और विराट दृष्टिकोण, सहयोग, सहिष्णुता तथा समावेशिता अपनानी चाहिए। बहुत छोटी-छोटी पंक्तियाँ और अधिकांश पंक्तियों का "में" पर समाप्त होना इसकी शिल्पगत विशेषता है।
लघुता बनाम विराटताअहंकार पर व्यंग्यकृत्रिम दीवारें और भेदकाव्य-शिल्प की छोटी पंक्तियाँ

Key ideas & terms

अनुपात
दो वस्तुओं का सापेक्षिक संबंध; यहाँ मनुष्य की लघुता और ब्रह्मांड की विराटता का अनुपात दिखाया गया है।
विराट और लघु
ब्रह्मांड की विशालता (विराट) के सामने मनुष्य का अत्यंत सूक्ष्म होना (लघु) — कविता का केंद्रीय विरोधाभास।
संख्यातीत शंख
"शंख" अर्थात 10 की सत्रहवीं घात जैसी विशाल संख्या; मनुष्य द्वारा खड़ी की गई असंख्य कृत्रिम दीवारों का प्रतीक।
दीवारें उठाना
मनुष्य द्वारा ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ के कारण लोगों के बीच कृत्रिम भेद और अलगाव की दीवारें खड़ी करना।
व्यंग्य
मनुष्य के अहंकार पर तीखी किंतु करुणा-भरी आलोचना — कविता का प्रमुख स्वर।
गिरिजा कुमार माथुर
प्रसिद्ध कवि (1919–1994), जिन्होंने "होंगे कामयाब" गीत का भावांतर भी रचा।

Extra questions & answers

कविता के अनुसार ब्रह्मांड में मानव का स्थान कैसा है?

ब्रह्मांड की तुलना में मानव अत्यंत सूक्ष्म और छोटा है; पृथ्वी ही अनगिनत नक्षत्रों में एक छोटा-सा ग्रह है।

कविता में मुख्यतः किन दो वस्तुओं का अनुपात दिखाया गया है?

कविता में मुख्यतः मानव और ब्रह्मांड का अनुपात — मनुष्य की लघुता और सृष्टि की विराटता — दिखाया गया है।

कवि छोटे से बड़े की ओर विस्तार किस क्रम में दिखाते हैं?

दो व्यक्ति → कमरा → घर → मोहल्ला → नगर → प्रदेश → देश → पृथ्वी → नक्षत्र → ब्रह्मांड — इस क्रम में विस्तार दिखाया गया है।

कविता के अनुसार मानव किन भावों और कार्यों में लिप्त रहता है?

मानव ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा और अविश्वास जैसे नकारात्मक भावों में लीन रहता है।

"संख्यातीत शंख सी दीवारें उठाता है" का क्या आशय है?

मनुष्य अपने अहंकार और स्वार्थ के कारण लोगों के बीच असंख्य कृत्रिम भेद और अलगाव की दीवारें खड़ी कर लेता है।

कविता के अनुसार मानव का सबसे बड़ा दोष क्या है?

अपने छोटेपन और सीमाओं को भूलकर अहंकारी बन जाना तथा स्वयं को दूसरों का स्वामी समझना मानव का सबसे बड़ा दोष है।

"एक कमरे में दो दुनिया रचाता है" से क्या व्यंग्य किया गया है?

इससे यह व्यंग्य किया गया है कि मनुष्य सीमित स्थान में भी भेदभाव और अलगाव पैदा कर लेता है, अर्थात मन की दूरियाँ बढ़ा लेता है।

कविता का स्वर क्रोध का है या कुछ और?

कवि क्रोध नहीं दिखाते; उनका स्वर करुणा, चिंता और कोमल व्यंग्य का है, जिससे वे मनुष्य को उसकी कमियों का बोध कराते हैं।

मनुष्य को विराटता पाने के लिए किन गुणों की आवश्यकता है?

सहयोग, समर्पण, सहिष्णुता, समावेशिता, विशालता और सहअस्तित्व जैसे सकारात्मक गुणों से मनुष्य अपना दृष्टिकोण विराट बना सकता है।

कविता की प्रमुख शिल्पगत विशेषताएँ क्या हैं?

बहुत छोटी-छोटी पंक्तियाँ, अधिकांश पंक्तियों का "में" पर समाप्त होना, छोटे से बड़े की ओर क्रमिक विस्तार और मानव के अहंकार पर तीखा व्यंग्य।

मेरी समझ से

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं। (1) कविता के अनुसार ब्रह्मांड में मानव का स्थान कैसा है? • पृथ्वी पर सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण • ब्रह्मांड की तुलना में अत्यंत सूक्ष्म • सूर्य, चंद्र आदि सभी नक्षत्रों से बड़ा • समस्त प्रकृति पर शासन करने वाला

कविता के अनुसार मानव ब्रह्मांड की तुलना में अत्यंत सूक्ष्म है। कवि कहता है कि अनगिन नक्षत्रों में पृथ्वी ही करोड़ों में एक छोटी है और उस पर रहने वाला मानव तो और भी छोटा है, इसलिए सही उत्तर ★ ब्रह्मांड की तुलना में अत्यंत सूक्ष्म है।

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं। (2) कविता में मुख्य रूप से किन दो वस्तुओं के अनुपात को दिखाया गया है? • पृथ्वी और सूर्य • देश और नगर • घर और कमरा • मानव और ब्रह्मांड

कविता में मुख्य रूप से मानव और ब्रह्मांड के अनुपात को दिखाया गया है। पूरी कविता इसी तुलना पर टिकी है कि विराट ब्रह्मांड के सामने मानव कितना लघु है, इसलिए सही उत्तर ★ मानव और ब्रह्मांड है।

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं। (3) कविता के अनुसार मानव किन भावों और कार्यों में लिप्त रहता है? • त्याग, ज्ञान और प्रेम में • सेवा और परोपकार में • ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा में • उदारता, धर्म और न्याय में

कविता के अनुसार मानव ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा और अविश्वास में लीन रहता है और इन्हीं भावों के कारण दीवारें खड़ी करता है, इसलिए सही उत्तर ★ ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा में है।

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं। (4) कविता के अनुसार मानव का सबसे बड़ा दोष क्या है? • वह अपनी सीमाओं और दुर्बलताओं को नहीं समझता। • वह दूसरों पर शासन स्थापित करना चाहता है। • वह प्रकृति के साथ तालमेल नहीं बिठा पाता है। • वह अपने छोटेपन को भूल अहंकारी हो जाता है।

कविता बताती है कि विराट ब्रह्मांड में अत्यंत छोटा होते हुए भी मानव अपने छोटेपन को भूल जाता है और अहंकार में दूसरों का स्वामी बनने लगता है। इसलिए ★ वह अपने छोटेपन को भूल अहंकारी हो जाता है और ★ वह दूसरों पर शासन स्थापित करना चाहता है दोनों ही सही उत्तर हैं, क्योंकि दूसरा पहले का ही परिणाम है।

(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ विचार कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?

हमने अपने उत्तर कविता की पंक्तियों के आधार पर चुने हैं। कविता बार-बार मानव की लघुता और ब्रह्मांड की विशालता का वर्णन करती है और अंत में मानव के ईर्ष्या-अहंकार की निंदा करती है, इसलिए हमने वही विकल्प चुने जो इन पंक्तियों से सीधे मेल खाते हैं। समूह चर्चा से पता चलता है कि सबने अपने अनुभव और समझ से अलग-अलग शब्दों पर ध्यान दिया, पर मूल भाव एक ही है।

पंक्तियों पर चर्चा

(क) “अनगिन नक्षत्रों में / पृथ्वी एक छोटी / करोड़ों में एक ही।”

इस पंक्ति का अर्थ है कि ब्रह्मांड में अनगिनत तारे और ग्रह हैं, उनमें हमारी पृथ्वी बहुत ही छोटी है और करोड़ों में से एक अनोखी है। इससे ब्रह्मांड की विशालता और पृथ्वी की लघुता तथा विशेषता दोनों स्पष्ट होती हैं।

(ख) “संख्यातीत शंख सी दीवारें उठाता है / अपने को दूजे का स्वामी बताता है।”

इस पंक्ति का अर्थ है कि छोटा सा मानव ईर्ष्या और अहंकार के कारण अनगिनत, शंख के समान असंख्य कृत्रिम दीवारें खड़ी कर लेता है और स्वयं को दूसरे व्यक्ति का मालिक समझने लगता है। यह मानव के अहंकार और विभाजनकारी प्रवृत्ति पर व्यंग्य है।

(ग) “देशों की कौन कहे / एक कमरे में / दो दुनिया रचाता है।”

इसका अर्थ है कि मानव का अलगाव इतना बढ़ गया है कि देशों के बँटवारे की तो बात ही क्या, वह एक ही छोटे कमरे में रहने वाले दो लोगों के बीच भी दो अलग दुनिया बना देता है। यह सीमित स्थान में भी मन के भेद और अविश्वास को दर्शाता है।

मिलकर करें मिलान

संख्यातीत शंख सी दीवारें

मनुष्य द्वारा खींची गई कृत्रिम सीमाएँ

पृथ्वी एक छोटी, करोड़ों में एक

पृथ्वी की अल्पता और अनोखेपन की ओर संकेत

ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा

मनुष्य की नकारात्मक भावनाएँ

दो व्यक्ति कमरे में / कमरे से छोटे

आदमी के संकुचित होने का प्रतीक

परिधि नभ गंगा की

ब्रह्मांड की विशालता का प्रतीक

एक कमरे में दो दुनिया रचाता

सीमित स्थान में भी और अलगाव की प्रवृत्ति

अनुपात

इस कविता में ‘मानव’ और ‘ब्रह्मांड’ के उदाहरण द्वारा व्यक्ति के अल्पत्व और सृष्टि की विशालता के अनुपात को दिखाया गया है। अपने साथियों के साथ मिलकर विचार कीजिए कि मानव को ब्रह्मांड जैसा विस्तार पाने के लिए इनमें से किन-किन गुणों या मूल्यों की आवश्यकता होगी? आपने ये गुण क्यों चुने, यह भी साझा कीजिए।

मानव को ब्रह्मांड जैसा विस्तार पाने के लिए सहअस्तित्व, विशालता, समावेशिता, सहनशीलता, सौहार्द, संतुलन, शांति, स्वतंत्रता और विविधता जैसे सकारात्मक मूल्यों की आवश्यकता है। ये गुण मन की दीवारों को गिराकर सबको साथ लेकर चलते हैं। ईर्ष्या, अहंकार, स्वार्थ, अविश्वास, वर्चस्व, सत्ता और विरोध जैसे नकारात्मक भाव संकुचित बनाते हैं, इसलिए उन्हें छोड़ना होगा। हमने ये गुण इसलिए चुने क्योंकि ब्रह्मांड सबको समेटे हुए है, वैसे ही मानव को भी उदार और समावेशी बनना चाहिए।

सोच-विचार के लिए

(क) कविता के अनुसार मानव किन कारणों से स्वयं को सीमाओं में बाँधता चला जाता है?

कविता के अनुसार मानव ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा और अविश्वास जैसे नकारात्मक भावों के कारण स्वयं को सीमाओं में बाँध लेता है। इन भावों से वह शंख के समान असंख्य दीवारें खड़ी करता है और दूसरों पर स्वामित्व जताने लगता है।

(ख) यदि आपको इस कविता की एक पंक्ति को दीवार पर लिखना हो, जो आपको प्रतिदिन प्रेरित करे तो आप कौन-सी पंक्ति चुनेंगे और क्यों?

मैं “सबको समेटे है परिधि नभ गंगा की” पंक्ति चुनूँगा/चुनूँगी। यह पंक्ति याद दिलाती है कि ब्रह्मांड की तरह हमें भी विशाल हृदय रखकर सबको अपनाना चाहिए, भेदभाव की दीवारें नहीं बनानी चाहिए।

(ग) कवि ने मानव की सीमाओं और कमियों की ओर ध्यान दिलाया है, लेकिन कहीं भी क्रोध नहीं दिखाया। आपको इस कविता का भाव कैसा लगा— व्यंग्य, करुणा, चिंता या कुछ और? क्यों?

मुझे इस कविता का भाव व्यंग्य और चिंता का मिला-जुला लगा। कवि ने क्रोध नहीं किया बल्कि हल्के व्यंग्य से समझाया कि इतना छोटा होकर भी मानव अहंकार करता है। इसमें करुणा भी है कि मानव अपनी ही बनाई दीवारों में कैद है, और चिंता भी है कि यदि ऐसा ही रहा तो मानवता बँट जाएगी।

(घ) आपके अनुसार ‘दीवारें उठाना’ केवल ईंट-पत्थर से जुड़ा काम है या कुछ और भी हो सकता है? अपने विचारानुसार समझाइए।

‘दीवारें उठाना’ केवल ईंट-पत्थर की दीवार नहीं है। यह मन की दीवारें भी हैं— जैसे जाति, धर्म, भाषा, अमीर-गरीब, लड़का-लड़की के भेद, डर, संकोच और अविश्वास। हम जब किसी से बात नहीं करते या उसे पराया समझते हैं, तब भी अदृश्य दीवार खड़ी करते हैं।

(ङ) मानवता के विकास में सहयोग, समर्पण और सहिष्णुता जैसी सकारात्मक प्रवृत्तियाँ ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ और घृणा जैसी नकारात्मक प्रवृत्तियों से कहीं अधिक प्रभावी हैं। उदाहरण देकर बताइए कि सहिष्णुता या सहयोग के कारण समाज में कैसे परिवर्तन आए हैं?

सहयोग और सहिष्णुता से समाज आगे बढ़ता है। उदाहरण के लिए, जब गाँव के लोग मिलकर स्कूल या सड़क बनाते हैं, या आपदा में एक-दूसरे की मदद करते हैं, तो सबका जीवन बेहतर होता है। स्वतंत्रता आंदोलन में भी लोगों ने मिलकर सहयोग किया तभी देश आज़ाद हुआ। इसके विपरीत ईर्ष्या और घृणा से झगड़े और बँटवारा ही बढ़ता है।

अनुमान और कल्पना

(क) मान लीजिए कि आप एक दिन के लिए पूरे ब्रह्मांड को नियंत्रित कर सकते हैं। अब आप मानव की कौन-कौन सी आदतों को बदलना चाहेंगे? क्यों?

मैं ईर्ष्या, अहंकार, स्वार्थ, घृणा और दूसरों पर हुकूमत करने की आदत को बदलना चाहूँगा/चाहूँगी। इनके बदले मैं सबमें प्रेम, सहयोग और समावेशिता भर दूँगा/दूँगी ताकि कोई दीवार न रहे और सब मिल-जुलकर रहें।

(ख) यदि आप अंतरिक्ष यात्री बन जाएँ और ब्रह्मांड के किसी दूसरे भाग में जाएँ तो आप किस स्थान (कमरा, घर, नगर आदि) को सबसे अधिक याद करेंगे और क्यों?

मैं अपने घर और मोहल्ले को सबसे अधिक याद करूँगा/करूँगी, क्योंकि वहीं मेरे परिवार, मित्र और बचपन की यादें हैं। ब्रह्मांड की विशालता के सामने वही छोटा स्थान सबसे अपना और सुकून देने वाला लगता है।

(ग) मान लीजिए कि एक बच्चा या बच्ची कविता में उल्लिखित सभी सीमाओं को पार कर सकता या सकती है— वह कहाँ तक जाएगा या जाएगी और क्या देखेगा या देखेगी? एक कल्पनात्मक यात्रा-वृत्तांत लिखिए।

वह बच्चा कमरे से निकलकर घर, मोहल्ला, नगर, प्रदेश, देश और पृथ्वी को पार करता हुआ नभ गंगा की परिधि तक जाएगा। वह अनगिन नक्षत्र, लाखों ब्रह्मांड, कितनी ही पृथ्वियाँ और सृष्टियाँ देखेगा और समझेगा कि हम कितने छोटे हैं पर कितने सुंदर ब्रह्मांड का हिस्सा हैं।

(घ) इस कविता को पढ़ने के बाद, आप स्वयं को ब्रह्मांड के अनुपात में कैसा अनुभव करते हैं? एक अनुच्छेद लिखिए— “मैं ब्रह्मांड में एक… हूँ।”

मैं ब्रह्मांड में एक बहुत छोटा कण हूँ। जैसे अनगिन नक्षत्रों में पृथ्वी एक छोटी बिंदी है, वैसे ही उस पृथ्वी पर मैं और भी छोटा हूँ। पर यह छोटापन मुझे दुखी नहीं करता, बल्कि नम्र बनाता है। मैं समझता/समझती हूँ कि अहंकार छोड़कर सबके साथ मिलकर रहूँ तो मेरा छोटा अस्तित्व भी सार्थक हो सकता है।

(ङ) मान लीजिए कि किसी दूसरे संसार से आपके पास संदेश आया है कि उसे पृथ्वी के किसी व्यक्ति की आवश्यकता है। आप किसे भेजना चाहेंगे और क्यों?

मैं एक दयालु, सहनशील और जिज्ञासु वैज्ञानिक या शिक्षक को भेजना चाहूँगा/चाहूँगी जो प्रेम और ज्ञान से दूसरे संसार को पृथ्वी की विविधता और संस्कृति समझा सके और वहाँ भी दीवारें न बनाए बल्कि मित्रता का सेतु बनाए।

(च) कविता में “ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ” जैसी प्रवृत्तियों की चर्चा की गई है। कल्पना कीजिए कि एक दिन के लिए ये भाव सभी व्यक्तियों में समाप्त हो जाएँ तो उससे समाज में क्या-क्या परिवर्तन होगा?

यदि एक दिन के लिए भी ये भाव समाप्त हो जाएँ तो कोई झगड़ा, भेदभाव और युद्ध नहीं होगा। लोग एक-दूसरे की मदद करेंगे, एक कमरे में भी दो दुनिया नहीं बल्कि एक परिवार होगा, और समाज में शांति, सहयोग और खुशी फैल जाएगी।

(छ) यदि आपको इस कविता का एक पोस्टर बनाना हो जिसमें इसके मूल भाव— ‘विराटता और लघुता’ तथा ‘मनुष्य का भ्रम’— दर्शाया जाए तो आप क्या चित्र, प्रतीक और शब्द उपयोग करेंगे? संक्षेप में बताइए।

पोस्टर के एक कोने में विशाल नभ गंगा, अनगिन तारे और कई पृथ्वियाँ दिखाऊँगा/दिखाऊँगी और दूसरे कोने में एक छोटा कमरा और उसमें दो अलग दुनिया बनाते लोग। बीच में “अहं की दीवारें तोड़ो, विराट बनो” जैसे शब्द लिखूँगा/लिखूँगी और टूटी दीवार का प्रतीक बनाऊँगा/बनाऊँगी।

शब्द से जुड़े शब्द

नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में ‘सृष्टि’ से जुड़े शब्द अपने समूह में चर्चा करके लिखिए — पृथ्वी, सृष्टि

सृष्टि से जुड़े शब्द हैं: ब्रह्मांड, नक्षत्र, पृथ्वी, भूमि, आकाशगंगा, नभ गंगा, विश्व, संसार, प्रकृति। ये सभी शब्द कविता में आई विशालता और रचना के भाव से जुड़े हैं। पृथ्वी सृष्टि का एक छोटा हिस्सा है, और सृष्टि ब्रह्मांड का विस्तार है।

सृजन

(क) कविता में कमरे से लेकर ब्रह्मांड तक का विस्तार दिखाया गया है। इस क्रम को अपनी तरह से एक रेखाचित्र, सीढ़ी या ‘मानसिक-चित्रण’ (माइंड-मैप) द्वारा प्रदर्शित कीजिए। प्रत्येक स्तर पर कुछ विशेषताएँ लिखिए, जैसे— पास-पड़ोस की एक विशेष बात, नगर का कोई स्थान, देश की विविधता आदि। उसके नीचे एक पंक्ति में इस प्रश्न का उत्तर लिखिए— “मैं इस चित्र में कहाँ हूँ और क्यों?”

मैं एक सीढ़ी बनाऊँगा/बनाऊँगी: सबसे नीचे आदमी → कमरा (मेरा पढ़ने का कोना) → घर (परिवार का प्यार) → पड़ोसी क्षेत्र (मिल-जुलकर खेलना) → नगर (मेरा स्कूल और बाज़ार) → देश (विविध भाषा और संस्कृति) → पृथ्वी (नीला ग्रह) → ब्रह्मांड (अनंत नभ गंगा)। मैं इस चित्र में सबसे नीचे छोटे आदमी के रूप में हूँ क्योंकि मैं विशाल ब्रह्मांड का एक छोटा पर महत्वपूर्ण हिस्सा हूँ और मुझे सबसे जुड़ना है।

(ख) अगर इसी कविता की तरह कोई कहानी लिखनी हो जिसका नाम हो ‘ब्रह्मांड में मानव’ तो उसको आरंभ कैसे करेंगे? कुछ वाक्य लिखिए।

एक रात नन्हा मानव छत पर लेटा तारों को देख रहा था। उसने सोचा— यह नभ गंगा कितनी बड़ी है और मैं कितना छोटा। तभी एक तारा टिमटिमाया जैसे कह रहा हो, छोटे होकर भी तुम प्रेम से बड़े बन सकते हो। वहीं से उसकी यात्रा शुरू हुई।

(ग) ‘एक कमरे में दो दुनिया रचाता है’ पंक्ति को ध्यान से पढ़िए। अगर आपसे कहा जाए कि आप एक ऐसी दुनिया बनाइए जिसमें कोई दीवार न हो तो वह कैसी होगी? उसका वर्णन कीजिए।

दीवार-रहित दुनिया में कोई भेद नहीं होगा। सब एक साथ खाएँगे, पढ़ेंगे और खेलेंगे। वहाँ ईर्ष्या और घृणा की जगह प्रेम, विश्वास और सहयोग होगा। घर, स्कूल और मोहल्ला सब खुले आँगन जैसे होंगे जहाँ हर कोई सबका है।

(घ) एक चित्र श्रृंखला बनाइए जिसमें ये क्रम दिखे— आदमी → कमरा → घर → पड़ोसी क्षेत्र → नगर → देश → पृथ्वी → ब्रह्मांड प्रत्येक चित्र में आकार का अनुपात दिखाया जाए जिससे यह स्पष्ट हो कि आदमी कितना छोटा है।

चित्र श्रृंखला में पहला चित्र सबसे छोटा आदमी, दूसरा उससे बड़ा कमरा, तीसरा और बड़ा घर, फिर क्रमशः पड़ोसी क्षेत्र, नगर, देश बड़े होते जाएँगे, फिर पृथ्वी बहुत बड़ी गोल और अंत में ब्रह्मांड सबसे विशाल काले आकाश में अनगिन तारों के साथ। इससे अनुपात स्पष्ट होगा कि आदमी ब्रह्मांड के सामने अत्यंत लघु है।

कविता की रचना

(क) अपने समूह के साथ मिलकर कविता की अन्य विशेषताओं की सूची बनाइए। अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।

कविता की अन्य विशेषताएँ हैं: बहुत छोटी-छोटी पंक्तियाँ, अधिकतर पंक्तियों का अंत ‘में’ शब्द से होना, सीढ़ी जैसा विस्तार क्रम, सरल शब्दों में गहरा दर्शन, तुक नहीं पर लय है, और निर्देशक चिह्न ‘—’ से सोच को ठहराव देना।

(ख) नीचे इस कविता की कुछ विशेषताएँ और वे पंक्तियाँ दी गई हैं जिनमें ये विशेषताएँ झलकती हैं। विशेषताओं का सही पंक्तियों से मिलान कीजिए— 1. सरल वाक्य के शब्दों को विशेष क्रम में लगाया गया है।

कमरा है घर में

(ख) नीचे इस कविता की कुछ विशेषताएँ और वे पंक्तियाँ दी गई हैं जिनमें ये विशेषताएँ झलकती हैं। विशेषताओं का सही पंक्तियों से मिलान कीजिए— 2. मुहावरे का प्रयोग किया गया है।

संख्यातीत शंख सी दीवारें उठाता है

(ख) नीचे इस कविता की कुछ विशेषताएँ और वे पंक्तियाँ दी गई हैं जिनमें ये विशेषताएँ झलकती हैं। विशेषताओं का सही पंक्तियों से मिलान कीजिए— 3. छोटे से बड़े की ओर विस्तार देने के लिए शब्दों को दोहराया गया है।

कमरा है घर में, घर है मोहल्ले में, मोहल्ला नगर में...

(ख) नीचे इस कविता की कुछ विशेषताएँ और वे पंक्तियाँ दी गई हैं जिनमें ये विशेषताएँ झलकती हैं। विशेषताओं का सही पंक्तियों से मिलान कीजिए— 4. प्रश्न शैली में व्यंग्य किया गया है।

देशों की कौन कहे, एक कमरे में दो दुनिया रचाता है

(ख) नीचे इस कविता की कुछ विशेषताएँ और वे पंक्तियाँ दी गई हैं जिनमें ये विशेषताएँ झलकती हैं। विशेषताओं का सही पंक्तियों से मिलान कीजिए— 5. अतिशयोक्ति से भरा कथन है (बढ़ा-चढ़ाकर कहना)।

संख्यातीत शंख सी दीवारें उठाता है

(ख) नीचे इस कविता की कुछ विशेषताएँ और वे पंक्तियाँ दी गई हैं जिनमें ये विशेषताएँ झलकती हैं। विशेषताओं का सही पंक्तियों से मिलान कीजिए— 6. मानव के अहंकार पर तीखा व्यंग्य किया गया है।

अपने को दूजे का स्वामी बताता है

कविता का सौंदर्य

(क) कविता में अलग-अलग प्रकार से ब्रह्मांड की विशालता को व्यक्त किया गया है। उनकी पहचान कीजिए।

कवि ने विशालता को इन रूपों में व्यक्त किया है: कमरे से घर, मोहल्ला, नगर, प्रदेश, देश, पृथ्वी तक सीढ़ी जैसा विस्तार; अनगिन नक्षत्रों और करोड़ों में एक पृथ्वी कहना; परिधि नभ गंगा का सबको समेटना; लाखों ब्रह्मांड और हर ब्रह्मांड में कितनी ही पृथ्वियाँ, भूमियाँ और सृष्टियाँ कहना।

(ख) “संख्यातीत शंख सी दीवारें उठाता है” “अपने को दूजे का स्वामी बताता है” “एक कमरे में दो दुनिया रचाता है” कविता में ये सारी क्रियाएँ मनुष्य के लिए आई हैं। आप अपने अनुसार कविता में नई क्रियाओं का प्रयोग करके कविता की रचना कीजिए।

मैं नई क्रियाओं से लिखूँगा/लिखूँगी: मानव द्वेष की गाँठें बाँधता है, अपने अहं में अंधा बनता है, छोटी बात पर बैर बढ़ाता है, फिर भी विराट का सपना सजाता है। यह रचना मूल भाव को बनाए रखते हुए मानव की क्रियाओं को नए रूप में दर्शाती है।

आपके शब्द

“सबको समेटे है परिधि नभ गंगा की” आपने ‘आकाशगंगा’ शब्द सुना और पढ़ा होगा। लेकिन कविता में ‘नभ गंगा’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया है। यह शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है। आप भी अपने समूह में मिलकर इसी प्रकार दो शब्दों को मिलाकर नए शब्द बनाइए।

दो शब्दों को मिलाकर नए शब्द: नभ + गंगा = नभ गंगा, जल + धारा = जलधारा, हिम + आलय = हिमालय, देश + भक्ति = देशभक्ति, पुस्तक + आलय = पुस्तकालय, नील + गगन = नीलगगन। इस तरह हम नए सामासिक शब्द बना सकते हैं।

आपके प्रश्न

“हर ब्रह्मांड में कितनी ही पृथ्वियाँ कितनी ही भूमियाँ कितनी ही सृष्टियाँ” क्या आपके मस्तिष्क में कभी इस प्रकार के प्रश्न आते हैं? अवश्य आते होंगे। अपने समूह के साथ मिलकर अपने मन में आने वाले प्रश्नों की सूची बनाइए। अपने शिक्षक, इंटरनेट और पुस्तकालय की सहायता से इन प्रश्नों के उत्तर ढूँढ़ने का प्रयास कीजिए।

मेरे मन में प्रश्न आते हैं: क्या दूसरे ब्रह्मांड में भी जीवन है? पृथ्वी के अलावा कितने ग्रहों पर जीवन संभव है? नभ गंगा में कितने तारे हैं? ब्रह्मांड का अंत कहाँ है? इन प्रश्नों के उत्तर मैं शिक्षक से पूछकर और विज्ञान की पुस्तकों तथा विश्वसनीय इंटरनेट स्रोतों से खोजूँगा/खोजूँगी।

विशेषण और विशेष्य

1. दो व्यक्ति कमरे में

विशेषण: दो, विशेष्य: व्यक्ति

2. अनगिन नक्षत्रों में

विशेषण: अनगिन, विशेष्य: नक्षत्रों

3. लाखों ब्रह्मांडों में

विशेषण: लाखों, विशेष्य: ब्रह्मांडों

4. अपना एक ब्रह्मांड

विशेषण: अपना, एक, विशेष्य: ब्रह्मांड

5. संख्यातीत शंख सी

विशेषण: संख्यातीत शंख सी, विशेष्य: दीवारें

6. एक कमरे में

विशेषण: एक, विशेष्य: कमरे

7. दो दुनिया रचाता है

विशेषण: दो, विशेष्य: दुनिया

आपकी बात

(क) कोई ऐसी स्थिति बताइए जहाँ ‘अनुपात’ बिगड़ गया हो— जैसे काम का बोझ अधिक और समय कम।

अनुपात बिगड़ने का उदाहरण: परीक्षा से एक दिन पहले पूरा पाठ्यक्रम याद करना— काम बहुत अधिक और समय बहुत कम। इससे तनाव बढ़ता है और तैयारी अधूरी रह जाती है। इसी तरह कमरे में बहुत अधिक लोग और हवा कम होना भी अनुपात बिगड़ना है।

(ख) आप अपने परिवार, विद्यालय या मोहल्ले में ‘विराटता’ (विशाल दृष्टिकोण) कैसे ला सकते हैं? कुछ उपाय सोचकर लिखिए। (संकेत— किसी को अनदेखा न करना, सबकी सहायता करना आदि)

मैं विराटता लाने के लिए सबकी बात सुनूँगा/सुनूँगी, किसी को अनदेखा नहीं करूँगा/करूँगी, भेदभाव नहीं करूँगा/करूँगी, जरूरतमंद की मदद करूँगा/करूँगी, समूह में मिलकर काम करूँगा/करूँगी और सबके विचारों का सम्मान करूँगा/करूँगी।

(ग) ‘करोड़ों में एक ही पृथ्वी’— इस पंक्ति को पढ़कर आपके मन में क्या भाव आता है? आप इस अनोखी पृथ्वी को सुरक्षित रखने के लिए क्या-क्या करेंगे?

यह पंक्ति पढ़कर गर्व और जिम्मेदारी का भाव आता है कि हमारी पृथ्वी अनोखी और दुर्लभ है। इसे सुरक्षित रखने के लिए मैं पेड़ लगाऊँगा/लगाऊँगी, पानी बचाऊँगा/बचाऊँगी, कचरा कम करूँगा/करूँगी, प्लास्टिक का उपयोग घटाऊँगा/घटाऊँगी और दूसरों को भी जागरूक करूँगा/करूँगी।

(घ) कविता हमें ‘अपने को दूजे का स्वामी बताने’ के प्रति सचेत करती है। आप अपने किन-किन गुणों को प्रबल करेंगे ताकि आपमें ऐसा भाव न आए?

मैं नम्रता, समानता, सहयोग, सहनशीलता और सम्मान जैसे गुणों को प्रबल करूँगा/करूँगी। दूसरों को छोटा नहीं समझूँगा/समझूँगी, सबको बराबर मानूँगा/मानूँगी और सेवा भाव से काम करूँगा/करूँगी ताकि स्वामी भाव न आए।

(ङ) अपने जीवन में ऐसी तीन ‘दीवारों’ के विषय में सोचिए जो आपने स्वयं खड़ी की हैं (जैसे— डर, संकोच आदि)। फिर एक योजना बनाइए कि आप उन्हें कैसे तोड़ेंगे? क्या समाज में भी ऐसी दीवारें होती हैं? उन्हें गिराने में हम कैसे सहायता कर सकते हैं?

मेरी तीन दीवारें हैं: नए लोगों से बात करने का संकोच, असफलता का डर और गुस्सा जल्दी आना। इन्हें तोड़ने के लिए मैं रोज़ एक नए मित्र से बात करूँगा/करूँगी, छोटी सफलताओं का अभ्यास करूँगा/करूँगी और गुस्से पर नियंत्रण के लिए गहरी साँस लूँगा/लूँगी। समाज में जाति, धर्म और अमीर-गरीब की दीवारें होती हैं, इन्हें हम आपसी बातचीत, सहयोग और समान अवसर देकर गिरा सकते हैं।

संख्यातीत शंख

1. जिस संख्या में 15 शून्य होते हैं, उसे क्या कहते हैं?

जिस संख्या में शून्य होते हैं अर्थात को पदम कहते हैं। तालिका में पदम है।

2. महाशंख में कितने शून्य होते हैं?

महाशंख में शून्य होते हैं। यह है।

3. एक लाख में कितने हजार होते हैं?

एक लाख में हजार होते हैं क्योंकि ।

4. उपर्युक्त तालिका के अनुसार सबसे छोटी और सबसे बड़ी संख्या कौन-सी है?

तालिका के अनुसार सबसे छोटी संख्या एक अर्थात और सबसे बड़ी संख्या महाशंख अर्थात है।

5. दस करोड़ और एक अरब को जोड़ने पर कौन-सी संख्या आएगी?

दस करोड़ और एक अरब को जोड़ने पर आएगा। यह एक अरब दस करोड़ है, जो करोड़ के बराबर है।