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एक टोकरी भर मिट्टी — Class 8 Hindi

मल्हार · Chapter 6Trending

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Chapter summary

माधवराव सप्रे की यह हिंदी की प्रारंभिक कहानियों में से एक मार्मिक कहानी है, जो न्याय, करुणा और मानवीय मूल्यों का संदेश देती है। एक श्रीमान ज़मींदार के महल के पास एक गरीब, अनाथ वृद्धा की झोंपड़ी थी, जिसमें उसका पति और पुत्र मर चुके थे और अब उसकी एकमात्र सहारा उसकी पाँच वर्ष की पोती थी। ज़मींदार अपने महल का अहाता बढ़ाने के लालच में वकीलों की मदद से अदालत के द्वारा वह झोंपड़ी हड़प लेता है और वृद्धा को निकाल देता है। एक दिन वृद्धा एक टोकरी लेकर लौटती है और विनती करती है कि उसकी पोती ने झोंपड़ी छूटने के दुख में खाना-पीना छोड़ दिया है, इसलिए वह उसी झोंपड़ी की एक टोकरी भर मिट्टी ले जाकर चूल्हा बनाना चाहती है। ज़मींदार अनुमति दे देता है। वृद्धा मिट्टी भरकर ज़मींदार से ही टोकरी उठाने में सहायता माँगती है, पर वह एक टोकरी मिट्टी भी नहीं उठा पाता। तब वृद्धा प्रतीकात्मक रूप से कहती है कि जब एक टोकरी मिट्टी का भार नहीं उठता तो हज़ारों टोकरी मिट्टी (अन्याय) का भार जन्म-भर कैसे उठाएगा। यह सुनकर ज़मींदार की आँखें खुल जाती हैं; वह पश्चाताप करता है, क्षमा माँगता है और झोंपड़ी वापस लौटा देता है।
न्याय और करुणामिट्टी का प्रतीकार्थपश्चाताप एवं हृदय-परिवर्तनमुहावरे और कथा-शिल्प

Key ideas & terms

ज़मींदार
धन-मद से गर्वित भूस्वामी, जो लालचवश गरीब वृद्धा की झोंपड़ी हड़प लेता है; बाद में पश्चाताप करता है।
वृद्धा
गरीब, अनाथ बुढ़िया, जो अपनी सूझबूझ और प्रतीकात्मक उक्ति से ज़मींदार को उसके अन्याय का बोध कराती है।
मिट्टी का प्रतीक
टोकरी भर मिट्टी अन्याय और पाप के भार का प्रतीक है — जो एक टोकरी न उठा सके वह हज़ारों का भार कैसे उठाएगा।
पश्चाताप
अपने अनुचित कार्य पर पछतावा; कहानी के अंत में ज़मींदार पश्चाताप कर क्षमा माँगता है और झोंपड़ी लौटा देता है।
"बाल की खाल निकालना"
मुहावरा — बारीकी से दोष ढूँढना; वकीलों के लिए प्रयुक्त, जिन्होंने कानूनी दाँव-पेच से झोंपड़ी हड़पी।
माधवराव सप्रे
हिंदी के प्रारंभिक कहानीकार (1871–1926), जिनकी मातृभाषा मराठी थी और जो लोकमान्य तिलक से प्रेरित थे।

Extra questions & answers

ज़मींदार को झोंपड़ी हटाने की आवश्यकता क्यों लगी?

वह अपने महल का अहाता उस झोंपड़ी तक बढ़ाना चाहता था, इसलिए उसने वृद्धा से झोंपड़ी हटाने को कहा।

ज़मींदार ने झोंपड़ी पर कब्ज़ा कैसे किया?

उसने "बाल की खाल निकालने वाले" वकीलों को पैसे देकर कानूनी दाँव-पेच से अदालत के माध्यम से झोंपड़ी पर कब्ज़ा कर लिया और वृद्धा को निकाल दिया।

वृद्धा की पोती ने खाना-पीना क्यों छोड़ दिया था?

उसे अपने घर से बहुत लगाव था; झोंपड़ी छूटने के दुख में उसने हठ कर लिया कि वह अपने ही घर में खाना खाएगी।

वृद्धा ने मिट्टी ले जाने की अनुमति किस प्रकार माँगी?

उसने अत्यंत विनती और नम्रता से, हाथ जोड़कर और पैरों पर गिरकर ज़मींदार से एक टोकरी मिट्टी ले जाने की अनुमति माँगी।

कहानी में मिट्टी किसका प्रतीक है?

मिट्टी अन्याय और पाप के भार का प्रतीक है; इसके बहाने वृद्धा ज़मींदार को बताना चाहती है कि अन्याय का नैतिक भार उठाना आसान नहीं।

वृद्धा के किस कथन से ज़मींदार की आँखें खुल गईं?

"आपसे एक टोकरी भर मिट्टी नहीं उठाई जाती, इस झोंपड़ी में तो हज़ारों टोकरी मिट्टी पड़ी है — उसका भार आप जन्म-भर कैसे उठा सकेंगे?"

ज़मींदार के व्यवहार में क्या परिवर्तन आया?

पहले वह धन-मद से गर्वित और कठोर था; वृद्धा की बात सुनकर उसमें दया और विनम्रता जागी, उसने पश्चाताप किया और झोंपड़ी वापस लौटा दी।

कहानी का अंत किस प्रकार का है?

कहानी का अंत प्रेरणादायक और सकारात्मक है — ज़मींदार अपनी भूल मानकर क्षमा माँगता है और न्याय की स्थापना होती है।

"सच्ची शक्ति दया और न्याय में है" — यह कहानी इसे कैसे सिद्ध करती है?

धन और बल वाला ज़मींदार एक गरीब वृद्धा की विवेकपूर्ण बात के आगे झुक जाता है, जिससे सिद्ध होता है कि सच्ची शक्ति दया और न्याय में निहित है।

इस कहानी का केंद्रीय संदेश क्या है?

लालच और अन्याय अंततः पराजित होते हैं; मनुष्य को धन के अहंकार में अपना कर्तव्य और मानवता नहीं भूलनी चाहिए।

मेरी समझ से

(क) (1) ज़मींदार को झोंपड़ी हटाने की आवश्यकता क्यों लगी? • झोंपड़ी जर्जर हो चुकी थी • झोंपड़ी रास्ते में बाधा थी • वह अहाते का विस्तार करना चाहता था • वृद्धा से उसका कोई पुराना झगड़ा था

ज़मींदार को झोंपड़ी हटाने की आवश्यकता इसलिए लगी क्योंकि वह अपने महल के अहाते का विस्तार उस झोंपड़ी तक करना चाहता था। कहानी में यही कारण बताया गया है, इसलिए सही विकल्प 'वह अहाते का विस्तार करना चाहता था' है।

(क) (2) वृद्धा ने मिट्टी ले जाने की अनुमति कैसे माँगी? • क्रोध और झगड़ा करके • अदालत से अनुमति लेकर • विनती और नम्रता से • चुपचाप उठाकर ले गई

वृद्धा ने मिट्टी ले जाने की अनुमति विनती और नम्रता से माँगी। उसने गिड़गिड़ाकर, हाथ जोड़कर ज़मींदार से विनम्र प्रार्थना की कि एक टोकरी भर मिट्टी ले जाने दें, इसलिए सही विकल्प 'विनती और नम्रता से' है।

(क) (3) वृद्धा की पोती का व्यवहार किस भाव को दर्शाता है? • दया • लगाव • गुस्सा • डर

वृद्धा की पोती का व्यवहार अपने घर के प्रति गहरे लगाव को दर्शाता है। वह अपना घर छोड़ने के बाद खाना-पीना छोड़ देती है और अपने घर में ही रोटी खाने की जिद करती है, इसलिए सही भाव 'लगाव' है।

(क) (4) कहानी का अंत कैसा है? • दुखद • सुखद • प्रेरणादायक • सकारात्मक

कहानी का अंत सुखद, प्रेरणादायक और सकारात्मक है। ज़मींदार को अपनी गलती का अहसास होता है, वह पश्चाताप करके वृद्धा से क्षमा माँगता है और झोंपड़ी वापस दे देता है, इसलिए तीनों विकल्प - सुखद, प्रेरणादायक और सकारात्मक सही हैं।

(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?

यह चर्चा-कार्य है। मैंने उत्तर कहानी के तथ्यों के आधार पर चुने हैं। ज़मींदार का अहाता बढ़ाने का लोभ, वृद्धा की विनम्रता, पोती का घर से मोह और अंत में न्याय की जीत - ये सभी कहानी में स्पष्ट रूप से दिए गए हैं, इसलिए मेरे चुनाव कहानी के प्रमाणों पर आधारित हैं।

मिलकर करें मिलान

1. अब यही उसकी पोती इस वृद्धाकाल में एकमात्र आधार थी।

वृद्धावस्था में वृद्धा का सहारा उसकी पोती ही थी।

2. बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम कर उन्होंने अदालत से उस झोंपड़ी पर अपना कब्ज़ा कर लिया।

ज़मींदार ने वकीलों को पैसे देकर कानूनी दाव-पेंच से झोंपड़ी पर कब्ज़ा किया।

3. आपसे एक टोकरी भर मिट्टी नहीं उठाई जाती और इस झोंपड़ी में तो हज़ारों टोकरियाँ मिट्टी पड़ी है।

वृद्धा ने टोकरी को प्रतीक बनाकर ज़मींदार को उसके अन्याय का अनुभव कराया।

4. ज़मींदार साहब धन-मद से गर्वित हो अपना कर्तव्य भूल गए थे।

धन और अहंकार ने ज़मींदार को मानवता और करुणा से दूर कर दिया था।

5. कृतकर्म का पश्चाताप कर उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँगी।

अपने द्वारा किए अन्याय पर पछताकर ज़मींदार ने क्षमा माँगी।

6. उसका भार आप जन्म-भर कैसे उठा सकेंगे?

वृद्धा ने प्रतीकात्मक रूप से कहा कि अन्याय का नैतिक भार उठाना आसान नहीं है।

7. कृपा करके इस टोकरी को ज़रा हाथ लगाइए जिससे कि मैं उसे अपने सिर पर धर लूँ।

वृद्धा ने टोकरी उठाने में सहायता के लिए ज़मींदार से विनम्र निवेदन किया।

8. उसे पुरानी बातों का स्मरण हुआ और उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगी।

झोंपड़ी में प्रवेश करते ही वृद्धा पुराने दिनों के कारण भावुक हो गई।

(ख) अपने मित्रों के उत्तर से अपने उत्तर मिलाइए और चर्चा कीजिए कि आपने कौन-से निष्कर्षों का चुनाव किया है और क्यों?

इकलौता — दिए गए वर्ण त्, आ, इ, औ, क्, ल् को जोड़ने पर बनने वाला शब्द 'इकलौता' है, जो कहानी में प्रयुक्त हुआ है ('इकलौता पुत्र')।

पंक्तियों पर चर्चा

(क) “आपसे एक टोकरी भर मिट्टी नहीं उठाई जाती और इस झोंपड़ी में तो हज़ारों टोकरियाँ मिट्टी पड़ी है। उसका भार आप जन्म-भर कैसे उठा सकेंगे?”

इस पंक्ति का अर्थ है कि एक टोकरी मिट्टी का भौतिक भार भी ज़मींदार नहीं उठा पाया, तो उसने जो अन्याय करके पूरी झोंपड़ी हड़पी है उसका नैतिक और आत्मिक भार वह जीवन भर कैसे उठाएगा। मिट्टी यहाँ छीने हुए घर, अन्याय और पाप के बोझ का प्रतीक है।

(ख) “ज़मींदार साहब पहले तो बहुत नाराज़ हुए, पर जब वह बार-बार हाथ जोड़ने लगी और पैरों पर गिरने लगी तो उनके भी मन में कुछ दया आ गई। किसी नौकर से न कहकर आप ही स्वयं टोकरी उठाने को आगे बढ़े। ज्यों ही टोकरी को हाथ लगाकर ऊपर उठाने लगे त्यों ही देखा कि यह काम उनकी शक्ति के बाहर है।”

इस पंक्ति से पता चलता है कि ज़मींदार शुरू में कठोर था पर वृद्धा की विनम्रता से उसमें थोड़ी करुणा जगी। उसने स्वयं टोकरी उठाने की कोशिश की, जिससे उसकी शक्ति की सीमा और अहंकार की व्यर्थता उजागर हुई। यह घटना उसके हृदय-परिवर्तन की शुरुआत है।

सोच-विचार के लिए

(क) आपके विचार से कहानी का सबसे प्रभावशाली पात्र कौन है और क्यों?

मेरे विचार से सबसे प्रभावशाली पात्र वृद्धा है। वह गरीब, असहाय होने पर भी बुद्धिमत्ता, विनम्रता और प्रतीकात्मक उपाय से शक्तिशाली ज़मींदार को उसका अन्याय समझा देती है और बिना लड़ाई के अपना घर वापस पा लेती है।

(ख) वृद्धा की पोती ने खाना क्यों छोड़ दिया था?

वृद्धा की पोती ने इसलिए खाना छोड़ दिया था क्योंकि वह अपने घर से बहुत प्यार करती थी। जब से झोंपड़ी छूटी, वह कहती थी कि अपने घर चल, वहीं रोटी खाऊँगी। घर से बिछोह ने उसे उदास कर दिया था।

(ग) ज़मींदार ने झोंपड़ी पर कब्ज़ा कैसे किया?

ज़मींदार ने पहले वृद्धा को मनाने की कोशिश की, फिर असफल होने पर बाल की खाल निकालने वाले वकीलों को पैसा देकर अदालत के द्वारा कानूनी दाव-पेंच से झोंपड़ी पर अपना कब्ज़ा कर लिया।

(घ) “महाराज क्षमा करें तो एक विनती है। ज़मींदार साहब के सिर हिलाने पर उसने कहा...”। यहाँ ज़मींदार द्वारा सिर हिलाने की इस क्रिया का क्या अर्थ है?

यहाँ सिर हिलाने का अर्थ है मौन स्वीकृति या अनुमति देना। ज़मींदार ने सिर हिलाकर वृद्धा को अपनी बात कहने की इजाज़त दी।

(ङ) “किसी नौकर से न कहकर आप ही स्वयं टोकरी उठाने आगे बढ़े।” यहाँ ज़मींदार के व्यवहार में परिवर्तन का आरंभ दिखाई देता है। पहले ज़मींदार का व्यवहार कैसा था? इस घटना के बाद उसके व्यवहार में क्या परिवर्तन आया?

पहले ज़मींदार घमंडी, लालची और कठोर था जो नौकरों से वृद्धा को हटवाता था। इस घटना में वृद्धा की विनम्रता से उसमें दया आई और वह स्वयं आगे बढ़ा। बाद में टोकरी न उठा पाने और वृद्धा के वचनों से उसे पश्चाताप हुआ और वह क्षमा माँगकर झोंपड़ी वापस देने वाला दयालु और न्यायप्रिय बन गया।

(च) “उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँगी और उसकी झोंपड़ी वापस दे दी।” ज़मींदार ने ऐसा क्यों किया?

ज़मींदार ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि वृद्धा के प्रतीकात्मक वचनों से उसकी आँखें खुल गईं। उसे समझ आया कि अन्याय का भार जीवन भर नहीं उठाया जा सकता और धन के मद में वह अपना कर्तव्य भूल गया था, इसलिए पश्चाताप करके उसने क्षमा माँगी।

अनुमान और कल्पना से

(क) यदि वृद्धा की पोती ज़मींदार से स्वयं बात करती तो वह क्या कहती?

पोती कहती - महाराज, यह झोंपड़ी ही मेरा घर है, यहीं मेरे माता-पिता की यादें हैं। कृपा करके हमारा छोटा सा घर हमें रहने दीजिए, हम कहीं और नहीं जा सकते।

(ख) यदि आप ज़मींदार की जगह होते तो क्या करते?

यदि मैं ज़मींदार की जगह होता तो गरीब वृद्धा की झोंपड़ी नहीं छीनता, बल्कि उसकी मदद करता, उसके घर की मरम्मत कराता और अहाते के विस्तार के लिए दूसरा उचित उपाय खोजता।

(ग) ज़मींदार को टोकरी उठाने में सफलता क्यों नहीं मिली होगी?

ज़मींदार को सफलता इसलिए नहीं मिली क्योंकि टोकरी केवल मिट्टी के भार से नहीं, बल्कि अन्याय, पाप और नैतिक बोझ के प्रतीक के कारण भारी हो गई थी। लेखक ने इसे नाटकीय रूप में दिखाया है कि अन्याय का भार शारीरिक शक्ति से नहीं उठाया जा सकता।

(घ) “झोंपड़ी में तो हज़ारों टोकरियाँ मिट्टी पड़ी है...”। यहाँ केवल मिट्टी की बात की जा रही है या कुछ और बात भी छिपी है? (संकेत— मिट्टी किस बात का प्रतीक हो सकती है? मिट्टी के बहाने वृद्धा क्या कहना चाहती है?)

यहाँ केवल मिट्टी की बात नहीं है। मिट्टी यहाँ घर, यादों, ममता, और सबसे बढ़कर अन्याय के बोझ का प्रतीक है। वृद्धा कहना चाहती है कि एक टोकरी का भार भी न उठा पाने वाले तुम पूरा घर हड़प कर उसके पाप का भार जन्म भर कैसे उठाओगे।

(ङ) यह कहानी आज से लगभग सवा सौ साल पहले लिखी गई थी। इस कहानी के आधार पर बताइए कि भारत में स्त्रियों को किन-किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता होगा?

उस समय स्त्रियाँ, विशेषकर विधवा और अनाथ वृद्धा, असहाय, गरीब और अधिकारहीन थीं। उन्हें संपत्ति, न्याय और सामाजिक सुरक्षा की चुनौतियों का सामना करना पड़ता था, पुरुष-प्रधान जमींदारी व्यवस्था में उनकी आवाज़ आसानी से दबा दी जाती थी।

बदली कहानी

कल्पना कीजिए कि कहानी कैसे आगे बढ़ती— • यदि ज़मींदार टोकरी उठाने से मना कर देता • यदि ज़मींदार टोकरी उठा लेता • यदि ज़मींदार मिट्टी देने से मना कर देता • यदि ज़मींदार एक स्त्री होती • यदि पोती ज़मींदार से अपनी झोंपड़ी वापस माँगती अपने समूह के साथ इनमें से किसी एक स्थिति को चुनकर चर्चा कीजिए। इस बदली हुई कहानी को मिलकर लिखिए।

मैं स्थिति चुनता हूँ - यदि ज़मींदार टोकरी उठाने से मना कर देता। तब वृद्धा निराश होकर चली जाती, पोती भूखी रहती और गाँव के लोग ज़मींदार की कठोरता की निंदा करते। धीरे-धीरे ज़मींदार की बदनामी फैलती और अंत में पंचायत के दबाव से उसे झोंपड़ी लौटानी पड़ती, पर उसका हृदय परिवर्तन देर से होता।

‘कि’ और ‘की’ का उपयोग

1. वृद्धा ने कहा ________________ वह झोंपड़ी को लेने नहीं आई है।

कि

2. वह अपनी पोती ________________ चिंता में दुखी हो गई थी।

की

3. वृद्धा ने प्रार्थना ________________ टोकरी को ज़रा हाथ लगाइए।

कि

4. पोती हमेशा कहती थी ________________ वह अपने घर में ही खाना खाएगी।

कि

5. झोंपड़ी ________________ मिट्टी से वृद्धा चूल्हा बनाना चाहती थी।

की

6. उसे विश्वास था ________________ मिट्टी का चूल्हा देखकर पोती खाना खाने लगेगी।

कि

7. वृद्धा ________________ आँखों से आँसुओं ________________ धारा बहने लगी।

की , की

8. उसने यह सोचा ________________ झोंपड़ी से मिट्टी ले जाकर चूल्हा बनाऊँगी।

कि

9. वृद्धा के मन ________________ पीड़ा उसकी बातों में झलक रही थी।

की

10. ज़मींदार इतने लज्जित हुए ________________ टोकरी उठाने की बात मान ली।

कि

11. उस झोंपड़ी ________________ हर दीवार वृद्धा ________________ यादों से भरी थी।

की , की

मुहावरे

(क) “बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम कर उन्होंने अदालत से झोंपड़ी पर अपना कब्ज़ा कर लिया।” इस वाक्य में मुहावरों की पहचान करके उन्हें रेखांकित कीजिए।

इस वाक्य में दो मुहावरे हैं - 1. बाल की खाल निकालना 2. थैली गरम करना।

'बाल बाँका न होना' मुहावरे का वाक्य में प्रयोग कीजिए। अर्थ— कुछ भी कष्ट या हानि न पहुँचना। पूर्ण रूप से सुरक्षित रहना।

सच्चे लोगों का बाल भी बाँका नहीं होता, ईश्वर उनकी रक्षा करता है।

'बाल बराबर' मुहावरे का वाक्य में प्रयोग कीजिए। अर्थ— बहुत सूक्ष्म। बहुत महीन या पतला।

उस कारीगर ने बाल बराबर नक्काशी करके मूर्ति को सुंदर बना दिया।

'बाल बराबर फर्क होना' मुहावरे का वाक्य में प्रयोग कीजिए। अर्थ— ज़रा-सा भी भेद होना। सूक्ष्मतम अंतर होना।

इन दोनों जुड़वाँ भाइयों में बाल बराबर भी फर्क नहीं है।

'बाल-बाल बचना' मुहावरे का वाक्य में प्रयोग कीजिए। अर्थ— कोई विपत्ति आने या हानि पहुँचने में बहुत थोड़ी कमी रह जाना।

कार दुर्घटना में रमेश बाल-बाल बच गया।

काल

(क) वह गिड़गिड़ाकर बोली। इस वाक्य को वर्तमान और भविष्य काल में बदलिए।

वर्तमान काल - वह गिड़गिड़ाकर बोलती है / बोल रही है। भविष्य काल - वह गिड़गिड़ाकर बोलेगी।

(ख) श्रीमान ने आज्ञा दे दी। इस वाक्य को वर्तमान और भविष्य काल में बदलिए।

वर्तमान काल - श्रीमान आज्ञा देते हैं / दे रहे हैं। भविष्य काल - श्रीमान आज्ञा देंगे।

(ग) उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगी। इस वाक्य को वर्तमान और भविष्य काल में बदलिए।

वर्तमान काल - उसकी आँखों से आँसू की धारा बह रही है। भविष्य काल - उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगेगी।

(घ) ज़मींदार साहब को अपने महल का अहाता उस झोंपड़ी तक बढ़ाने की इच्छा हुई। इस वाक्य को वर्तमान और भविष्य काल में बदलिए।

वर्तमान काल - ज़मींदार साहब को अपने महल का अहाता उस झोंपड़ी तक बढ़ाने की इच्छा हो रही है। भविष्य काल - ज़मींदार साहब को अपने महल का अहाता उस झोंपड़ी तक बढ़ाने की इच्छा होगी।

(ङ) उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँगी और उसकी झोंपड़ी वापस दे दी। इस वाक्य को वर्तमान और भविष्य काल में बदलिए।

वर्तमान काल - वे वृद्धा से क्षमा माँगते हैं और उसकी झोंपड़ी वापस देते हैं / माँग रहे हैं और दे रहे हैं। भविष्य काल - वे वृद्धा से क्षमा माँगेंगे और उसकी झोंपड़ी वापस दे देंगे।

वचन की पहचान

(क) वृद्धा झोंपड़ी के भीतर ________________ । (गई/गईं)

गई

(ख) वृद्धा गिड़गिड़ाकर ________________ । (बोली/बोलीं)

बोली

(ग) पोती ने खाना-पीना छोड़ दिया ________________ । (है/हैं)

है

(घ) उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगी ________________ । (थी/थीं)

थी

(ङ) उसने अपनी टोकरी मिट्टी से भर ली और बाहर ले ________________ । (आई/आईं)

आई

(च) झोंपड़ी में बसी पुरानी यादें वृद्धा को रुला ________________ । (गई/गईं)

गईं

(छ) पाठक देख सकते हैं कि कैसे एक छोटी-सी टोकरी ने बड़े बदलाव ला दिए ________________। (है/हैं)

हैं

कहानी की रचना

(क) आपको इस कहानी में ऐसी अनेक विशेषताएँ दिखाई देंगी। उन्हें अपने समूह के साथ मिलकर ढूँढ़िए और उनकी सूची बनाइए।

कहानी की विशेषताएँ - संवादात्मकता, भावुकता, नाटकीयता, वर्णनात्मकता, प्रश्नोत्तरी शैली, चरित्र-चित्रण, सरल भाषा और नैतिक संदेश।

1. प्रश्नोत्तरी शैली— कहानी में ऐसे प्रश्न हैं जो पाठक को सोचने पर विवश कर देते हैं। कहानी से उदाहरण दीजिए।

उदाहरण - 'उसका भार आप जन्म-भर कैसे उठा सकेंगे? आप ही इस बात पर विचार कीजिए।'

2. वर्णनात्मकता— लेखक ने जगहों और भावनाओं का ऐसा चित्र खींचा है कि पाठक दृश्य को देख सकता है। कहानी से उदाहरण दीजिए।

उदाहरण - 'उसे पुरानी बातों का स्मरण हुआ और उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगी।'

3. भावात्मकता— कहानी में करुणा, पछतावा और प्रेम जैसे गहरे भाव दिखते हैं। कहानी से उदाहरण दीजिए।

उदाहरण - 'जब उसे अपनी पूर्वस्थिति की याद आ जाती तो मारे दुख के फूट-फूट कर रोने लगती थी।' और 'कृतकर्म का पश्चाताप कर उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँगी।'

4. संवादात्मकता— पात्रों के संवादों से कहानी आगे बढ़ती है और प्रभावी बनती है। कहानी से उदाहरण दीजिए।

उदाहरण - वृद्धा का कथन - 'महाराज, कृपा करके इस टोकरी को ज़रा हाथ लगाइए जिससे कि मैं उसे अपने सिर पर धर लूँ।'

5. नाटकीयता— कुछ दृश्य इतने प्रभावशाली हैं कि वे नाटक जैसे लगते हैं। कहानी से उदाहरण दीजिए।

उदाहरण - ज़मींदार का पूरी ताकत लगाकर भी टोकरी को एक हाथ भी ऊपर न उठा पाना और लज्जित होकर कहना 'नहीं, यह टोकरी हमसे न उठाई जाएगी।'

6. चरित्र चित्रण— पात्रों के गुण, स्वभाव और मन की स्थिति स्पष्ट रूप से दिखती है। कहानी से उदाहरण दीजिए।

उदाहरण - ज़मींदार - 'धन-मद से गर्वित हो अपना कर्तव्य भूल गए थे' और वृद्धा - विनम्र, बुद्धिमती और सहनशील।

शब्दकोश का उपयोग

1. श्रीमान के सब प्रयत्न निष्फल हुए - रेखांकित शब्द 'श्रीमान' का अर्थ क्या है?

पुरुषों के नाम के पूर्व आदर सूचनार्थ लगाया जाने वाला शब्द।

2. पतोहू भी एक पाँच बरस की कन्या को छोड़कर चल बसी थी - रेखांकित शब्द 'कन्या' का अर्थ क्या है?

लड़की, अविवाहित लड़की।

3. ज़मींदार साहब को अपने महल का अहाता उस झोंपड़ी तक बढ़ाने की इच्छा हुई - रेखांकित शब्द 'महल' का अर्थ क्या है?

राजा या रईस आदि के रहने का बहुत बड़ा और बढ़िया मकान, प्रासाद।

4. वह तो कई ज़माने से वहीं बसी थी - रेखांकित शब्द 'ज़माने' का अर्थ क्या है?

बहुत अधिक समय, काल, अवधि।

5. यही उसकी पोती इस वृद्धाकाल में एकमात्र आधार थी - रेखांकित शब्द 'आधार' का अर्थ क्या है?

सहारा, आलंबन, आश्रय देने वाला।

भावों की पहचान

1. वह लज्जित होकर कहने लगे— ‘नहीं, यह टोकरी हमसे न उठाई जाएगी।’ - भाव बताइए।

लज्जा / पछतावा

2. वृद्धा के उपर्युक्त वचन सुनते ही उनकी आँखें खुल गईं। - भाव बताइए।

बोध / आत्मज्ञान

3. उनके मन में कुछ दया आ गई। - भाव बताइए।

करुणा / दया

4. इससे भरोसा है कि वह रोटी खाने लगेगी। - भाव बताइए।

आस्था / विश्वास

5. महाराज क्षमा करें तो एक विनती है। - भाव बताइए।

विनम्रता / विनय

6. अब यही उसकी पोती इस वृद्धाकाल में एकमात्र आधार थी। - भाव बताइए।

ममता / स्नेह

7. ज़मींदार साहब धन-मद से गर्वित हो अपना कर्तव्य भूल गए थे। - भाव बताइए।

अहंकार / घमंड

8. उस झोंपड़ी में उसका मन ऐसा कुछ लग गया था कि बिना मरे वहाँ से वह निकलना ही नहीं चाहती थी। - भाव बताइए।

जड़ाव / मोह

9. जब उसे अपनी पूर्वस्थिति की याद आ जाती तो मारे दुख के फूट-फूट कर रोने लगती थी। - भाव बताइए।

दुख / पीड़ा

10. बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम कर उन्होंने अदालत से झोंपड़ी पर अपना कब्ज़ा कर लिया। - भाव बताइए।

क्रूरता / अन्याय

वाक्य विस्तार

1. एक झोंपड़ी थी। कहानी को ध्यान में रखते हुए लगभग 15-20 शब्दों में विस्तार कीजिए।

गरीब अनाथ वृद्धा की छोटी सी झोंपड़ी ज़मींदार के विशाल महल के पास स्थित थी, जिसमें उसकी पाँच साल की पोती के साथ उसकी सारी यादें बसी थीं।

2. श्रीमान टहल रहे थे। कहानी को ध्यान में रखते हुए लगभग 15-20 शब्दों में विस्तार कीजिए।

अहंकारी ज़मींदार अपनी नई हड़पी हुई झोंपड़ी के आस-पास गर्व से टहल रहे थे और मजदूरों को अहाता बढ़ाने का काम समझा रहे थे।

3. वह खाने लगेगी। कहानी को ध्यान में रखते हुए लगभग 15-20 शब्दों में विस्तार कीजिए।

वृद्धा को पूरा विश्वास था कि झोंपड़ी की मिट्टी से बना चूल्हा देखकर उसकी रूठी हुई पोती फिर से मन से रोटी खाने लगेगी।

4. वृद्धा भीतर गई। कहानी को ध्यान में रखते हुए लगभग 15-20 शब्दों में विस्तार कीजिए।

आँखों में आँसू लिए थकी-हारी वृद्धा धीरे-धीरे अपनी पुरानी झोंपड़ी के भीतर गई और पुरानी यादों में खो गई।

5. आगे बढ़े। कहानी को ध्यान में रखते हुए लगभग 15-20 शब्दों में विस्तार कीजिए।

वृद्धा की बार-बार विनती से द्रवित होकर ज़मींदार स्वयं बिना नौकर की मदद के टोकरी उठाने के लिए आगे बढ़े।

संवाद फोन पर

(क) कल्पना कीजिए कि यह कहानी आज के समय की है। ज़मींदार वृद्धा की पोती को समझाना चाहता है कि वह जिद छोड़ दे और भोजन कर ले। उसने पोती को फोन किया है। अपनी कल्पना से दोनों की बातचीत लिखिए।

ज़मींदार - हेलो बेटा, मैं ज़मींदार बोल रहा हूँ, खाना खा लो, जिद मत करो। पोती - नहीं, आपने हमारा घर छीन लिया, मैं अपने घर में ही खाऊँगी। ज़मींदार - बेटा मुझे माफ कर दो, मैं तुम्हारा घर वापस दे रहा हूँ, अब तो खा लो। पोती - सच? धन्यवाद, अब मैं जरूर खाऊँगी।

(ख) कल्पना कीजिए कि ज़मींदार और उसका कोई मित्र वृद्धा की झोंपड़ी हथियाने के बारे में मोबाइल पर लिखित संदेशों द्वारा चर्चा कर रहे हैं। मित्र उसे समझा रहा है कि वह झोंपड़ी न हड़पे। उनकी इस लिखित चर्चा को अपनी कल्पना से भाव मुद्रा (इमोजी) के साथ लिखिए।

मित्र - यार, उस गरीब वृद्धा की झोंपड़ी मत लो, तुम्हें किस बात की कमी है? 🤔 ज़मींदार - 😡 मुझे उपदेश मत दो, मुझे अहाता बढ़ाना है। मित्र - 🙏 सोचो, गरीब को बेघर करना पाप है, लोग क्या कहेंगे? ज़मींदार - 🤔 तुम ठीक कह रहे हो, मैं विचार करता हूँ।

पोती की भावनाएँ

(क) कहानी में वृद्धा की पोती एक महत्वपूर्ण पात्र है, भले ही उसका उल्लेख केवल एक-दो पंक्तियों में ही हुआ है। कल्पना कीजिए कि आप ही वह पोती हैं। आपको अपने घर से बहुत प्यार है। अपने घर को बचाने के लिए जिलाधिकारी को एक पत्र लिखिए।

मान्यवर जिलाधिकारी महोदय, मैं पाँच वर्ष की अनाथ बालिका हूँ। ज़मींदार ने हमारी झोंपड़ी छीन ली है। यही हमारा एकमात्र घर है, जिसमें मेरे माता-पिता की यादें हैं। कृपा करके हमारी झोंपड़ी हमें वापस दिलाएँ। धन्यवाद। आपकी विश्वासी - पोती।

(ख) मान लीजिए कि वृद्धा की पोती डायरी लिखती थी। कहानी की घटनाओं के आधार पर कल्पना कीजिए कि उसने अपनी डायरी में क्या लिखा होगा? स्वयं को पोती के स्थान पर रखते हुए वह डायरी लिखिए।

2 मई - आज दादी घर पर आईं तो बहुत परेशान थीं। मैंने बहुत पूछा। उन्होंने बताया ज़मींदार ने हमारी प्यारी झोंपड़ी छीन ली है। मुझे अपना घर बहुत याद आता है, मैं वहीं रोटी खाऊँगी, यहाँ नहीं। भगवान करे दादी हमारी झोंपड़ी वापस ले आएँ।

आपकी बात

(क) कहानी में वृद्धा की पोती अपने घर से बहुत प्यार करती थी। आपके घर से अपने लगाव का अनुभव बताइए।

मुझे भी अपने घर से बहुत लगाव है। मेरे घर के आँगन, मेरे कमरे की दीवारों और बचपन की यादों से मेरा गहरा जुड़ाव है, उसे छोड़ने की कल्पना भी मुझे दुखी कर देती है।

(ख) क्या कभी आपको किसी स्थान, वस्तु या व्यक्ति से इतना लगाव हुआ है कि उसे छोड़ना मुश्किल लगा हो? अपना अनुभव साझा कीजिए।

हाँ, मुझे अपने दादाजी की दी हुई साइकिल से बहुत लगाव था। जब वह पुरानी हो गई और नई लेनी पड़ी तो उसे छोड़ते हुए मैं बहुत उदास हुआ था।

(ग) कहानी में ज़मींदार अपने किए पर पश्चाताप कर रहा है। क्या आपने कभी किसी को उनके किए पर पछताते हुए देखा है? उस घटना के बारे में बताइए। यह भी बताइए कि उस पश्चाताप का क्या परिणाम निकला?

हाँ, मेरे मित्र ने गुस्से में अपने भाई को चोट पहुँचाई और बाद में बहुत पछताया। उसने माफी माँगी और दोनों में फिर से प्रेम बढ़ गया। पश्चाताप से रिश्ता सुधर गया।

(घ) क्या कभी ऐसा हुआ कि आपने कोई काम गुस्से या अहंकार में किया हो और बाद में पछताए हों? फिर आपने क्या किया? उस अनुभव से आपने क्या सीखा?

हाँ, मैंने एक बार गुस्से में मित्र की किताब फाड़ दी थी। बाद में मुझे पछतावा हुआ, मैंने माफी माँगी और नई किताब लाकर दी। मैंने सीखा कि गुस्से में कोई काम नहीं करना चाहिए।

न्याय और समता

(क) क्या आपने किसी के साथ ऐसा अन्याय देखा, पढ़ा या सुना है? उसके बारे में बताइए।

हाँ, मैंने देखा है कि कभी-कभी शक्तिशाली लोग गरीबों की जमीन हड़प लेते हैं। जैसे कहानी में ज़मींदार ने किया, वैसे ही गाँव में एक दबंग ने गरीब किसान का खेत छीनने की कोशिश की थी।

(ख) ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए आप क्या-क्या कर सकते हैं? आपके आस-पास के लोग क्या-क्या कर सकते हैं?

ऐसी स्थिति में हम शिकायत कर सकते हैं, पंचायत, पुलिस या जन-सुनवाई पोर्टल पर मदद माँग सकते हैं। आस-पास के लोग मिलकर पीड़ित को सहारा दे सकते हैं और न्याय दिलाने में मदद कर सकते हैं।

(ग) “सच्ची शक्ति दया और न्याय में है।” इस कथन पर अपने विचार लिखिए।

सच्ची शक्ति शारीरिक बल या धन में नहीं, बल्कि दया और न्याय में है। ज़मींदार ताकतवर होते हुए भी टोकरी न उठा सका, पर वृद्धा की विनम्रता और न्याय की भावना ने उसे जीत दिलाई।

आज की पहेली

1. ट् क् र् ई ओ् = टोकरी

टोकरी

2. य् आ द = _____________

दया

3. ई ल व क् = _____________

वकील

4. झ् ओ ई प ड़् अं = _____________

झोंपड़ी

5. ज द् आ म् ई र् अं = _____________

जमींदार

6. त् आ इ औ क ल् = _____________

कौतिल / तकिला? सही शब्द - लौकित? यहाँ अपेक्षित शब्द 'किताब'? पर दिए अक्षरों से बनता शब्द 'तालिका' या 'कौतिल' - सबसे उपयुक्त 'ताकि' नहीं। अक्षरों से 'किलात' - सही उत्तर 'तिलक' हो सकता है, पर पाठ के संदर्भ में 'किताब' नहीं। दिए अक्षरों त् आ इ औ क ल् से बनता शब्द 'कौतालि'? पाठ से शब्द 'तालिक'? अनुमानित सही शब्द 'किलौता'? छात्र के लिए 'लौकिक'।

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हमारे देश में हजारों सालों से कहानियाँ सुनी-सुनाई जाती रही हैं। ऐसी ही एक अद्भुत पुस्तक हितोपदेश है। अपने पुस्तकालय से हितोपदेश की कहानियों की पुस्तक खोजकर पढ़िए और इसकी कोई एक कहानी कक्षा में सुनाइए।

यह खोज कार्य है। मैंने पुस्तकालय से हितोपदेश की पुस्तक लेकर 'लालची कुत्ता' और 'बंदर और मगरमच्छ' जैसी नीतिपरक कहानियाँ पढ़ीं। इन कहानियों में चालाकी और मूर्खता के परिणाम बताए गए हैं, जो हमें जीवन में समझदारी से काम लेना सिखाती हैं।