ProSyllabusLearn a little. Grow every day.Log in
YOUR STUDY SPACE · CBSE

मत बाँधो — Class 8 Hindi

मल्हार · Chapter 7

Visual story

Watch as story →

CBSE Class 8 community

View all
All available subjects
~140days leftAnnual exams · school dates varyFeb–Mar 2027 · school-specific · tentative
Every subject, one purchase
  • Mathematics
  • Science
  • + 3 more
~7 pages per kitPage 1 free
Mathematics
~140days leftAnnual exams · school dates varyFeb–Mar 2027 · school-specific · tentative
All 2 books, one purchase
  • Mathematics
~7 pages per kitPage 1 free
Science
~140days leftAnnual exams · school dates varyFeb–Mar 2027 · school-specific · tentative
TrendingEvery important point, highly compressed.
  • Space weighted by chapter size
  • Charts from the book's own data
  • Traps corrected
Only 7 pagesPage 1 free
हिंदी
~140days leftAnnual exams · school dates varyFeb–Mar 2027 · school-specific · tentative
Every important point, highly compressed.
  • Space weighted by chapter size
  • Charts from the book's own data
  • Traps corrected
Only 7 pagesPage 1 free
Social Science
~140days leftAnnual exams · school dates varyFeb–Mar 2027 · school-specific · tentative
TrendingEvery important point, highly compressed.
  • Space weighted by chapter size
  • Charts from the book's own data
  • Traps corrected
Only 7 pagesPage 1 free
English · Poorvi
~140days leftAnnual exams · school dates varyFeb–Mar 2027 · school-specific · tentative
Every important point, highly compressed.
  • Space weighted by chapter size
  • Charts from the book's own data
  • Traps corrected
Only 7 pagesPage 1 free
Browse all Class 8 kits →

Chapter summary

महादेवी वर्मा की यह कविता सपनों और कल्पनाओं की स्वतंत्रता का सशक्त आह्वान है। कवयित्री बार-बार कहती हैं — "इन सपनों के पंख न काटो, इन सपनों की गति मत बाँधो!" वे चाहती हैं कि सपनों को न तो ऊपर उठने (आरोहण) से रोका जाए और न नीचे आने (अवरोहण) से बाँधा जाए। कविता में सौरभ (सुगंध), बीज, अग्नि और धुएँ जैसे उदाहरणों से सपनों की विशेषता समझाई गई है — जैसे सुगंध आकाश में उड़ जाती है और बीज धूल में गिर जाने पर उड़ नहीं पाता, वैसे ही सपनों में आरोहण और अवरोहण दोनों गतियाँ हैं; सपना विचार की तरह जन्म लेता है और व्यवहार में आकर सच्चाई बन जाता है। कवयित्री विश्वास करती हैं कि मुक्त आकाश में विचरण करता सपना तारों में मिल जाएगा और मेघों के रंग व किरणों की दीप्ति लेकर धरती पर लौटेगा तथा धरती को स्वर्ग बनाने का कोई न कोई शिल्प सिखाएगा। इस प्रकार कविता स्वतंत्र विचार, कल्पनाशीलता और रचनात्मकता का संदेश देती है — यदि सपनों को स्वतंत्रता मिले तो वे समाज को सुंदर, समृद्ध और शांतिपूर्ण बना सकते हैं। बीज से पौधा बनने की तरह सपनों को भी परिश्रम और लगन रूपी पोषण चाहिए।
सपनों की स्वतंत्रताआरोहण और अवरोहणमानवीकरण एवं शब्द-चित्ररचनात्मकता का संदेश

Key ideas & terms

सपनों की स्वतंत्रता
कविता का केंद्रीय भाव — सपनों, कल्पनाओं और विचारों को बंधनमुक्त रहने देना ताकि वे साकार हो सकें।
आरोहण-अवरोहण
ऊपर उठना और नीचे आना — सपनों की दो गतियाँ; विचार के रूप में जन्म और व्यवहार में परिणति का प्रतीक।
सौरभ/बीज का दृष्टांत
सुगंध आकाश में उड़ जाती है, बीज धूल में गिरकर रुक जाता है — इनसे सपनों की विशेषता समझाई गई है।
स्वर्ग का शिल्प
सपना धरती को सुंदर, समृद्ध और शांतिपूर्ण "स्वर्ग" बनाने का कोई न कोई रचनात्मक उपाय (शिल्प) सिखाएगा।
संबोधन शैली
"मत बाँधो", "पंख न काटो" — सपनों को बाँधने वालों के प्रति प्रार्थना/निवेदन के रूप में संबोधन।
महादेवी वर्मा
छायावाद की प्रमुख कवयित्री (1907–1987), ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित; "गिल्लू" जैसी रचनाएँ भी प्रसिद्ध।

Extra questions & answers

कविता का मुख्य भाव क्या है?

कविता का मुख्य भाव है कि सपनों, कल्पनाओं और विचारों की स्वतंत्रता बनी रहनी चाहिए; उन्हें बाँधना या रोकना नहीं चाहिए।

"इन सपनों के पंख न काटो" में सपनों के "पंख" की कल्पना क्यों की गई है?

क्योंकि सपने पंखों की तरह हमें कल्पना और संभावनाओं की ऊँचाइयों तक उड़ान भरने और भ्रमण करने की प्रेरणा देते हैं।

सौरभ और बीज के उदाहरण से कवयित्री क्या समझाती हैं?

सुगंध आकाश में उड़ जाती है पर लौटती नहीं, बीज धूल में गिरकर उड़ नहीं पाता — इनसे वे सपनों की विशेष "आरोहण-अवरोहण" गति को रेखांकित करती हैं।

"आरोहण" और "अवरोहण" का कविता में क्या महत्त्व है?

सपना विचार के रूप में ऊपर उठता है (आरोहण) और व्यवहार में पूरा होकर नीचे लौटता है (अवरोहण); दोनों गतियों से ही सपना सच्चाई बनता है।

"स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प भूमि को सिखलायेगा" का आशय क्या है?

मुक्त सपना मेघों के रंग और किरणों की दीप्ति लेकर लौटेगा और धरती को सुंदर, समृद्ध व शांतिपूर्ण बनाने का कोई रचनात्मक उपाय सिखाएगा।

कविता में किसे और क्यों संबोधित किया गया है?

उन सभी शक्तियों या लोगों को संबोधित किया गया है जो सपनों और स्वतंत्र विचारों को बाँधते या दबाते हैं; उद्देश्य है कल्पना को मुक्त रहने देना।

"सपनों में दोनों ही गति है, उड़कर आँखों में आता है" से क्या भाव व्यक्त होता है?

सपना उड़कर (कल्पना से) आँखों में लौट आता है, अर्थात कल्पना अंततः वास्तविकता बनकर सामने आ जाती है।

यदि सपने बीज की तरह हों तो उन्हें उगने के लिए किसकी आवश्यकता है?

जैसे बीज को धूप और पानी चाहिए, वैसे ही सपनों को मेहनत (धूप) और लगन (पानी) रूपी पोषण की आवश्यकता होती है।

कविता की प्रमुख काव्य-विशेषताएँ क्या हैं?

इसमें संबोधन, प्रश्न-शैली, विपरीतार्थक शब्द (आरोहण-अवरोहण), शब्द-चित्रों की लड़ी और सपने का मानवीकरण जैसी विशेषताएँ हैं।

इस कविता का समाज के लिए क्या संदेश है?

रचनात्मक और स्वतंत्र विचार समाज को सुंदर, समृद्ध और शांतिपूर्ण बना सकते हैं, इसलिए हर व्यक्ति को सपने देखने और उन्हें पूरा करने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।