एक आशीर्वाद — Class 8 Hindi
मल्हार · Chapter 3
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Chapter summary
Key ideas & terms
- स्वप्न
- इस कविता में आकांक्षा, अभिलाषा और बड़े लक्ष्य का प्रतीक; पूरी कविता इसी एक संज्ञा के इर्द-गिर्द बुनी गई है।
- आशीर्वाद
- बड़ों द्वारा छोटों को दी जाने वाली शुभकामना; यहाँ बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का आशीष दिया गया है।
- उँगली जलाना
- कष्ट और चुनौतियों से न घबराकर अनुभव व ज्ञान पाने की ललक का प्रतीकात्मक भाव।
- आत्मनिर्भरता
- "अपने पाँवों पर खड़े होना" — दूसरों पर निर्भर न रहकर स्वयं अपने बल पर खड़े होने की भावना।
- क्रिया-शृंखला
- चलना, रूठना, मचलना, हँसना, गाना, ललचाना जैसी क्रियाओं की लड़ी, जिनसे "स्वप्न" को मानवीय रूप मिला है।
- दुष्यंत कुमार
- हिंदी के लोकप्रिय कवि (1933–1975), जिनका सर्वाधिक चर्चित ग़ज़ल-संग्रह "साये में धूप" है।
Extra questions & answers
कविता में किसे संबोधित किया गया है?
कविता बच्चों अथवा युवा वर्ग — अर्थात कवि की अगली पीढ़ी — को संबोधित है, जिसे वे आशीर्वाद देते हैं।
"तेरे स्वप्न बड़े हों" से कवि का क्या आशय है?
कवि चाहते हैं कि नई पीढ़ी ऊँची आकांक्षाएँ और बड़े लक्ष्य निर्धारित करे तथा उन्हें पाने का प्रयास करे।
कवि बच्चों को भावनाओं की गोद से उतरने को क्यों कहते हैं?
क्योंकि वे चाहते हैं कि बच्चे केवल कल्पना में न रहें, बल्कि धरती पर अपने पैरों पर चलकर वास्तविकता का सामना करना सीखें।
"उँगली जलाएँ" पंक्ति का भाव क्या है?
इसका भाव है कि कठिनाइयों और कष्टों से न घबराकर चुनौतियों को स्वीकार करते हुए अनुभव व ज्ञान पाने की ललक रखें।
"अपने पाँवों पर खड़े हों" से क्या आशय है?
इससे आत्मनिर्भर बनने का आशय है — दूसरों पर आश्रित न रहकर अपने बल पर जीवन में आगे बढ़ना।
"चाँद-तारों-सी अप्राप्य सच्चाइयों के लिए रूठना-मचलना" का अर्थ क्या है?
इसका अर्थ है कि असंभव से लगने वाले ऊँचे लक्ष्यों को पाने के लिए हठ और निरंतर प्रयास करना चाहिए।
कविता में "स्वप्न" को किस प्रकार चित्रित किया गया है?
स्वप्न को मनुष्य की तरह हँसते, मुस्कुराते, गाते और मचलते हुए चित्रित कर उसे जीवंत व्यक्तित्व प्रदान किया गया है।
कविता का शीर्षक "एक आशीर्वाद" क्यों रखा गया है?
क्योंकि पूरी कविता एक बड़े द्वारा अगली पीढ़ी को बड़े सपने देखने और आत्मनिर्भर बनने का स्नेहमय आशीष है, यद्यपि "आशीर्वाद" शब्द कविता में नहीं आया।
ललक के साथ और किन बातों की आवश्यकता है?
केवल ललक पर्याप्त नहीं; सपनों को पूरा करने के लिए योजना, परिश्रम, लगन और निरंतर प्रयास की भी आवश्यकता होती है।
कविता का मूल संदेश क्या है?
मनुष्य को बड़े सपने देखने चाहिए, कठिनाइयों से न घबराकर साहसपूर्वक प्रयास करना चाहिए और आत्मनिर्भर बनना चाहिए।
मेरी समझ से
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं। 1. कविता में किसे संबोधित किया गया है? • युवा वर्ग को • नागरिकों को • बच्चों को • श्रमिकों को
कविता में मुख्य रूप से बच्चों को संबोधित किया गया है, परन्तु यह आशीर्वाद व्यापक रूप से युवा वर्ग के लिए भी है। कवि चाहता है कि नन्हे सपने अर्थात कोमल कल्पनाएँ धीरे-धीरे बड़े और आत्मनिर्भर बनें, इसलिए 'बच्चों को' और 'युवा वर्ग को' दोनों उत्तर उपयुक्त माने जा सकते हैं।
2. ‘तेरे स्वप्न बड़े हों’ पंक्ति में ‘स्वप्न’ से क्या आशय है? • कल्पना की उड़ान भरना • आकांक्षाएँ और रुचियाँ रखना • बहुत-सी उपलब्धियाँ पाना • बड़े लक्ष्य निर्धारित करना
यहाँ 'स्वप्न' का अर्थ केवल सोते हुए देखे गए सपने नहीं है, बल्कि बड़े लक्ष्य निर्धारित करना है। इसमें आकांक्षाएँ और रुचियाँ रखना भी शामिल है। कवि का आशीर्वाद है कि बच्चों की सोच बड़ी हो, वे ऊँचे लक्ष्य बनाएँ और उन्हें पाने की इच्छा रखें। इसलिए 'बड़े लक्ष्य निर्धारित करना' और 'आकांक्षाएँ और रुचियाँ रखना' सही उत्तर हैं।
3. “उँगली जलाएँ” पंक्ति में उँगली जलाने का भाव है— • चुनौतियों को स्वीकार करना • प्रकाश का प्रसार करना • अग्नि के ताप का अनुभव करना • कष्टों से नहीं घबराना
'उँगली जलाएँ' का भाव है कि ज्ञान या लक्ष्य पाने की ललक इतनी हो कि कठिनाई का डर न हो। दीये की रोशनी की ओर खिंचने पर उँगली जल भी सकती है, फिर भी जिज्ञासा न छोड़ी जाए। इसलिए इसका अर्थ है चुनौतियों को स्वीकार करना और कष्टों से नहीं घबराना।
4. “अपने पाँवों पर खड़े हों” पंक्ति से क्या आशय है? • अपने पैरों पर खड़े होना • सफलता प्राप्त करना • कठिनाइयों का सामना करना • आत्मनिर्भर होना
इस पंक्ति का सीधा शाब्दिक अर्थ अपने पैरों पर खड़ा होना है, पर कविता में इसका भाव आत्मनिर्भर होना है। कवि चाहता है कि सपने दूसरों के सहारे नहीं, बल्कि स्वयं के प्रयास से पूरे हों, व्यक्ति कठिनाइयों का सामना करके सफल हो। इसलिए 'आत्मनिर्भर होना' सबसे सटीक भाव है।
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
हमने उत्तर कविता के भाव के आधार पर चुने। 'स्वप्न' को हमने लक्ष्य और आकांक्षा के रूप में समझा क्योंकि कविता सपनों को हँसने-गाने वाले सजीव रूप में दिखाती है। 'उँगली जलाएँ' को हमने चुनौती स्वीकारने के रूप में लिया क्योंकि जिज्ञासा के साथ जोखिम भी आता है। 'अपने पाँवों पर खड़े हों' को आत्मनिर्भरता माना क्योंकि कवि अंत में स्वतंत्र बनने का आशीर्वाद देता है। चर्चा से पता चला कि एक ही पंक्ति के कई अर्थ हो सकते हैं।
मिलकर करें मिलान
भावना की गोद से उतरकर जल्द पृथ्वी पर चलना सीखें
भावनाओं में न बहकर वास्तविकता का सामना करना
हर दीये की रोशनी देखकर ललचाएँ
विविध ज्ञान के प्रति आकृष्ट होना और उसे पाने की ललक होना
चाँद-तारों-सी अप्राप्य सच्चाइयों के लिए रूठना-मचलना सीखें
असंभव से लगने वाले लक्ष्यों के लिए हठ और प्रयास करना
...हँसें/मुसकराएँ/गाएँ
सपनों को आनंद और मुस्कुराहटों में बदलें। कठिन परिस्थितियों में भी मनोबल बनाए रखें।
पंक्तियों पर चर्चा
(क) “जा, तेरे स्वप्न बड़े हों”
इस पंक्ति में कवि का आशीर्वाद है कि हमारे सपने छोटे और स्वार्थ तक सीमित न रहें। बड़े सपने का अर्थ है ऊँचा लक्ष्य, बड़ा सोच और दूसरों के भले की कल्पना। जैसे-जैसे हम बढ़ते हैं, हमारे सपने भी परिपक्व और विशाल होने चाहिए।
(ख) “जल्द पृथ्वी पर चलना सीखें”
इसका अर्थ है कि केवल कल्पनाओं की गोद में न रहें, बल्कि जल्दी ही वास्तविक जीवन में उतरकर व्यावहारिक बनें। सपने देखना अच्छा है, पर उन्हें जमीन पर उतारकर मेहनत करना, चलना-गिरना-फिर सीखना जरूरी है।
(ग) “चाँद-तारों-सी अप्राप्य सच्चाइयों के लिए रूठना-मचलना सीखें”
कुछ सच्चाइयाँ या लक्ष्य चाँद-तारों जैसे दूर लगते हैं। कवि कहता है कि बच्चे जैसे खिलौने के लिए रूठकर मचलते हैं, वैसे ही हमें बड़े और कठिन लगने वाले लक्ष्यों के लिए जिद और लगन दिखानी चाहिए, हार नहीं माननी चाहिए।
अनुमान और कल्पना से
(क) कविता में सपनों के बड़े होने की बात की गई है। आपके अनुसार बड़े सपने कौन-कौन से हो सकते हैं और क्यों?
मेरे अनुसार बड़े सपने वे हैं जो केवल अपने लिए नहीं, सबके लिए हों - जैसे डॉक्टर बनकर सबका इलाज करना, वैज्ञानिक बनकर पर्यावरण बचाना, शिक्षक बनकर सबको पढ़ाना या देश को स्वच्छ और समान बनाना। बड़े सपने इसलिए बड़े होते हैं क्योंकि वे मेहनत माँगते हैं और पूरे होने पर कई लोगों का जीवन बेहतर बनाते हैं।
(ख) “हर दीये की रोशनी देखकर ललचाएँ/उँगली जलाएँ” पंक्ति में सपनों और लक्ष्यों को पूरा करने के लिए ललक की बात की गई है। ललक के साथ और क्या-क्या होना आवश्यक है और क्यों? (संकेत— योजना, प्रयास आदि)
केवल ललक से सपना पूरा नहीं होता। ललक के साथ योजना, निरंतर प्रयास, धैर्य, अनुशासन और असफलता से सीखने का साहस चाहिए। योजना से रास्ता स्पष्ट होता है, प्रयास से आगे बढ़ते हैं, और धैर्य से उँगली जलने पर भी हिम्मत नहीं टूटती। सहयोग और मार्गदर्शन भी जरूरी है।
(ग) कल्पना कीजिए कि आपका सपना ही आपका मित्र है। आपको उससे बातचीत करनी हो तो क्या बात करेंगे?
मैं अपने सपने - मित्र से कहूँगा: मेरे प्यारे सपने, तुम बड़े हो जाओ, मैं तुम्हें रोज याद करूँगा। तुम मुझे बताओ तुम्हें पाने के लिए मुझे किताबें पढ़नी होंगी, सुबह जल्दी उठना होगा? यदि मैं थक जाऊँ तो तुम मुझे हँसाना, मुस्कुराना सिखाना। मैं वादा करता हूँ मैं तुम्हें छोड़ूँगा नहीं, तुम भी मेरा साथ मत छोड़ना।
(घ) यदि आप किसी को आशीर्वाद देना चाहते हों तो आप किसे और क्या आशीर्वाद देंगे और क्यों?
मैं अपने छोटे भाई को आशीर्वाद दूँगा - जा, तेरी जिज्ञासा कभी खत्म न हो, तू हर नई बात सीखने के लिए उत्सुक रहे और अपने पैरों पर खड़ा होकर ईमानदारी से अपना लक्ष्य पाए। क्योंकि वह अभी छोटा है और उसमें सीखने की बहुत ललक है, मेरा आशीर्वाद उसे हिम्मत देगा।
कविता की रचना
इस कविता में सपने को मनुष्य की तरह हँसते, मुसकराते, गाते हुए बताया गया है। ध्यान से देखें तो इस कविता में इस प्रकार की अन्य विशेषताएँ भी दिखाई देंगी। उन्हें लिखिए और कक्षा में उन पर चर्चा कीजिए।
कविता में मानवीकरण अलंकार है - सपने को बच्चा माना गया है। अन्य विशेषताएँ: 1) छोटे-छोटे वाक्यों और क्रियाओं की लय (चलना, रूठना, मचलना, हँसना), 2) पुनरावृत्ति - 'जा, तेरे स्वप्न बड़े हों' दो बार आशीर्वाद की तरह, 3) प्रतीक - दीया ज्ञान का, चाँद-तारे दूर के लक्ष्य का, पृथ्वी वास्तविकता का प्रतीक हैं, 4) सरल और गेय भाषा जो गीत जैसी लगती है।
सृजन
इस कविता के आरंभ में एक ही संज्ञा शब्द है ‘स्वप्न’। इस शब्द को केंद्र में रखते हुए अनेक क्रिया शब्दों का ताना-बाना बुना गया है, जैसे— चलना, रूठना, मचलना, सीखना, हँसना, मुसकुराना, गाना, ललचाना और इस प्रकार कविता पूरी हो जाती है। आप भी किसी एक संज्ञा शब्द के साथ विभिन्न क्रिया शब्दों का प्रयोग करते हुए अपनी कविता बनाकर कक्षा में सुनाइए। उदाहरण के लिए— बादल को घिरते देखा है, गरजते देखा है, बरसते देखा है, ______________________ .
यथार्थ — शेष सभी शब्द (सपना, ख़्वाब, स्वप्न आदि) कल्पना/स्वप्न के पर्याय हैं, जबकि 'यथार्थ' का अर्थ वास्तविकता है, इसलिए यह भिन्न (odd one) है।
कविता का शीर्षक
इस कविता का शीर्षक ‘एक आशीर्वाद’ है जो कविता में कहीं भी प्रयुक्त नहीं हुआ है। यदि इस कविता की ही किसी पंक्ति या शब्द को कविता का शीर्षक बनाना हो तो आप कौन-सी पंक्ति या शब्द चुनेंगे और क्यों?
मैं 'तेरे स्वप्न बड़े हों' को शीर्षक चुनूँगा क्योंकि यही कविता का मुख्य आशीर्वाद और संदेश है और यह पंक्ति दो बार आती है। दूसरा विकल्प 'अपने पाँवों पर खड़े हों' भी हो सकता है क्योंकि यह आत्मनिर्भरता का सार है। शीर्षक कविता के भाव को सीधे बताता है।
भाषा की बात
(क) नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में ‘स्वप्न’ से जुड़े शब्द अपने समूह में चर्चा करके लिखिए—
'स्वप्न' से जुड़े शब्द: सपना, कल्पना, इच्छा, आकांक्षा, लक्ष्य, अरमान, मनोरथ, ख्वाब, उम्मीद। वाक्य में प्रयोग: मेरे स्वप्न बड़े हैं, मेरी कल्पना उड़ान भरती है, मेरी इच्छा डॉक्टर बनने की है।
(ख) कविता में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं और उनके सामने कुछ अन्य शब्द भी दिए गए हैं। उन शब्दों पर घेरा बनाइए जो समान अर्थ नहीं देते हों— पृथ्वी - धरा, वसुधा, अवनि, सुता | चाँद - मधुकर, शशि, निशाकर, मयंक | तारे - नक्षत्र, सोम, तारक, उडुगण | रोशनी - प्रकाश, लालिमा, उजाला, आलोक | स्वप्न - सपना, इच्छा, यथार्थ, कल्पना | दीया - दीन, ज्योति, दीपक, प्रदीप
समान अर्थ नहीं देने वाले शब्द: पृथ्वी के लिए 'सुता' (सुता का अर्थ पुत्री है), चाँद के लिए 'मधुकर' (मधुकर का अर्थ भौंरा है), तारे के लिए 'सोम' (सोम चाँद को कहते हैं), रोशनी के लिए 'लालिमा' (लालिमा लाल रंग है, रोशनी नहीं), स्वप्न के लिए 'यथार्थ' (यथार्थ वास्तविकता है, स्वप्न का विलोम है - 'इच्छा' भी ठीक पर्याय नहीं), दीया के लिए 'दीन' (दीन का अर्थ गरीब है)।
आना-जाना
‘आना’ और ‘जाना’ दो महत्वपूर्ण क्रियाएँ हैं। कक्षा में दो समूह बनाइए। एक समूह का नाम ‘आना’ और दूसरे समूह का नाम ‘जाना’ होगा। अब अपने-अपने समूह में इन दोनों क्रियाओं का प्रयोग करते हुए सार्थक वाक्य बनाइए और उन्हें चार्ट पेपर पर चिपकाकर अपनी कक्षा में लगाइए।
'आना' समूह के वाक्य: 1) अतिथि कल हमारे घर आएँगे। 2) सुबह-सुबह चिड़ियाँ आँगन में आती हैं। 'जाना' समूह के वाक्य: 1) हम कल मेले में जाएँगे। 2) पिताजी काम पर गए हैं। दोनों क्रियाएँ दिशा बताती हैं - आना अपनी ओर आना, जाना दूर जाना।
डायरी
हँसें-मुसकराएँ-गाएँ — अपने किसी एक दिन की समस्त गतिविधियों पर ध्यान दीजिए और अपनी डायरी में लिखिए कि आप दिनभर में कब-कब हँसे, कब-कब मुसकराए, कब-कब गाए, कब-कब रूठे, कब-कब मचले?
डायरी - 7 अगस्त: आज सुबह दोस्त के जोक पर खुलकर हँसा, अध्यापिका की प्रशंसा पर मुसकराया, शाम को नहाते हुए गाना गाया, माँ ने खेलने से मना किया तो थोड़ा रूठा, पर फिर नए खिलौने के लिए मचला और माँ ने समझाकर मना लिया। मैंने सीखा कि हँसना-मुसकराना दिन को सुंदर बनाता है और रूठना-मचलना भी भावनाओं का हिस्सा है।
आपकी बात
(क) कविता के माध्यम से बड़े लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें पूरा करने का आशीर्वाद दिया गया है। दिन-प्रतिदिन के जीवन में आपको अपने माता-पिता, अध्यापक एवं परिजनों से किस तरह के आशीर्वाद मिलते हैं? अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।
माता-पिता रोज कहते हैं - खूब मन लगाकर पढ़ो, स्वस्थ रहो, सच बोलो। अध्यापक आशीर्वाद देते हैं - परिश्रम करो, अनुशासन में रहो, जिज्ञासु बनो। दादी कहती हैं - खुश रहो, सबका सम्मान करो। ये आशीर्वाद मुझे मेहनत और अच्छे आचरण की प्रेरणा देते हैं।
(ख) आप भी अपने से छोटों के प्रति किसी न किसी प्रकार से शुभेच्छा प्रकट करते हैं, उन्हें लिखिए।
मैं अपनी छोटी बहन से कहता हूँ - तुम्हारी चित्रकारी बहुत अच्छी हो, तुम रोज नया कुछ सीखो, डरो मत, मैं तुम्हारे साथ हूँ। अपने पड़ोस के छोटे बच्चे को कहता हूँ - खूब खेलो, खूब पढ़ो, बड़े सपने देखो।
सपनों की बातें
आप क्या करना चाहते हैं और क्या पाना चाहते हैं? उन्हें एक पर्ची पर लिखें। पर्ची पर अपना नाम लिखना आवश्यक नहीं है। अपने अध्यापक द्वारा लाए गए डिब्बे में अपनी-अपनी पर्ची को डाल दें। अध्यापक एक-एक करके इन पर्चियों पर लिखे सपनों को पढ़कर सुनाएँ। सभी विद्यार्थी अपने-अपने सुझाव दें कि उन सपनों को पूरा करने के लिए — किस तरह के प्रयत्न करने होंगे?
यदि किसी का सपना वैज्ञानिक बनना है तो उसे विज्ञान विषय रोज पढ़ना, प्रयोग करना, प्रश्न पूछना और विज्ञान मेलों में भाग लेना होगा। निरंतर अभ्यास और जिज्ञासा प्रयत्न है।
आप क्या करना चाहते हैं और क्या पाना चाहते हैं? उन्हें एक पर्ची पर लिखें। पर्ची पर अपना नाम लिखना आवश्यक नहीं है। अपने अध्यापक द्वारा लाए गए डिब्बे में अपनी-अपनी पर्ची को डाल दें। अध्यापक एक-एक करके इन पर्चियों पर लिखे सपनों को पढ़कर सुनाएँ। सभी विद्यार्थी अपने-अपने सुझाव दें कि उन सपनों को पूरा करने के लिए — किस तरह से योजना बनानी होगी?
योजना के लिए समय-सारिणी बनानी होगी - रोज कितनी देर पढ़ना, कौन-सी किताबें पढ़नी, किस परीक्षा की तैयारी कब करनी। छोटे-छोटे लक्ष्य जैसे इस महीने एक प्रोजेक्ट पूरा करना।
आप क्या करना चाहते हैं और क्या पाना चाहते हैं? उन्हें एक पर्ची पर लिखें। पर्ची पर अपना नाम लिखना आवश्यक नहीं है। अपने अध्यापक द्वारा लाए गए डिब्बे में अपनी-अपनी पर्ची को डाल दें। अध्यापक एक-एक करके इन पर्चियों पर लिखे सपनों को पढ़कर सुनाएँ। सभी विद्यार्थी अपने-अपने सुझाव दें कि उन सपनों को पूरा करने के लिए — किससे और किस प्रकार का सहयोग लिया जा सकता है?
माता-पिता से समय और प्रोत्साहन, अध्यापकों से मार्गदर्शन, पुस्तकालय और इंटरनेट से जानकारी, दोस्तों से समूह चर्चा और वरिष्ठों से अनुभव का सहयोग लिया जा सकता है।
आप क्या करना चाहते हैं और क्या पाना चाहते हैं? उन्हें एक पर्ची पर लिखें। पर्ची पर अपना नाम लिखना आवश्यक नहीं है। अपने अध्यापक द्वारा लाए गए डिब्बे में अपनी-अपनी पर्ची को डाल दें। अध्यापक एक-एक करके इन पर्चियों पर लिखे सपनों को पढ़कर सुनाएँ। सभी विद्यार्थी अपने-अपने सुझाव दें कि उन सपनों को पूरा करने के लिए — लक्ष्य-प्राप्ति में संभावित चुनौतियाँ कौन-कौन सी हो सकती हैं?
चुनौतियाँ हो सकती हैं - समय की कमी, आर्थिक कठिनाई, असफलता का डर, संसाधनों की कमी या आत्मविश्वास में कमी। इनसे घबराना नहीं, बल्कि वैकल्पिक उपाय खोजना और धैर्य रखना चाहिए।
हमारे सपने
आपके माता-पिता या अभिभावक आपकी आवश्यकताओं और इच्छाओं को जानते-समझते हैं। वे उन्हें पूरा करने के लिए यथासंभव प्रयत्न करते हैं। अपने माता-पिता या अभिभावक से उनके द्वारा देखे गए सपने और इच्छाओं के बारे में पूछिए कि वे क्या-क्या करना चाहते थे या चाहते हैं? नीचे दी गई तालिका में उन सपनों को लिखिए। आप इस तालिका को और बढ़ा सकते हैं। माता, पिता, दादा, दादी, नाना, नानी, बहन, भाई — घर के सदस्यों के सपने
उदाहरण तालिका: माता - सिलाई सीखकर बुटीक खोलना चाहती थीं, अब बच्चों को अच्छी शिक्षा देना चाहती हैं। पिता - शिक्षक बनना चाहते थे, अब ईमानदारी से नौकरी करना चाहते हैं। दादा - गाँव में पुस्तकालय बनाना चाहते थे। दादी - सबको अच्छा खाना खिलाना और भजन सीखना। भाई - क्रिकेट खिलाड़ी बनना चाहता है। बहन - डॉक्टर बनना चाहती है। इस चर्चा से पता चलता है कि हर पीढ़ी के सपने अलग पर प्रेरणादायक होते हैं।
सबके सपने
प्रतिदिन की आवश्यकताओं को पूरा करने में बहुत-से लोग सहयोग देते हैं, जैसे— शाक विक्रेता, स्वच्छताकर्मी, रिक्शाचालक, सुरक्षाकर्मी आदि। इनमें से किसी एक से साक्षात्कार कीजिए और उनके सपनों के विषय में जानिए। साक्षात्कार के समय कौन-कौन से प्रश्न हो सकते हैं? उनकी एक सूची भी बनाइए।
मैंने स्वच्छताकर्मी से बात की। उनके सपने: अपने बच्चों को पढ़ा-लिखाकर बड़ा आदमी बनाना। साक्षात्कार के प्रश्न: 1) आप यह काम कब से कर रहे हैं? 2) आपका सबसे बड़ा सपना क्या है? 3) अपने बच्चों के लिए आप क्या चाहते हैं? 4) आपको अपने काम में क्या कठिनाई आती है? 5) सरकार या समाज से आप क्या सहयोग चाहते हैं? 6) आप अपने सपने पूरे करने के लिए क्या प्रयास कर रहे हैं?
साझी समझ
आपने ‘एक आशीर्वाद’ कविता पढ़ी और डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का उपर्युक्त उद्बोधन भी पढ़ा। अब आप इन दोनों पर कक्षा में अपने साथियों के साथ चर्चा कीजिए।
दोनों में सपनों को बड़ा और सक्रिय बताया गया है। कविता कहती है सपने हँसें, गाएँ, आत्मनिर्भर बनें और कठिन लक्ष्य के लिए मचलें। कलाम कहते हैं सपने वे नहीं जो नींद में आते हैं, बल्कि वे जो सोने न दें और जिसके लिए जागते रहना पड़ता है। दोनों का संदेश एक है - बड़ा सोचो, योजना बनाओ, समय का सही उपयोग करो और प्रयत्न से सपने सच करो।
खोजबीन के लिए
कला, विज्ञान, राजनीति, खेलकूद, मनोरंजन आदि क्षेत्रों में ख्याति प्राप्त करने वाले व्यक्तियों ने अपने-अपने सपनों को पूरा करने की संघर्ष यात्रा के बारे में लिखा है। उन्होंने अपने सपनों को साकार करने के लिए किस तरह से योजना बनाई, क्या-क्या संघर्ष किए? पुस्तकालय अथवा इंटरनेट की सहायता से ऐसे व्यक्तियों के बारे में पढ़िए।
मैंने कल्पना चावला के बारे में पढ़ा - उन्होंने अंतरिक्ष यात्री बनने का सपना देखा, इंजीनियरिंग पढ़ी, अमेरिका जाकर नासा में कड़ा परिश्रम किया, कई बार असफलता के बाद भी हार नहीं मानी। सचिन तेंदुलकर ने बचपन से क्रिकेट का सपना देखा, रोज घंटों अभ्यास किया, चोटों और आलोचना का सामना किया। दोनों ने योजना, अनुशासन और निरंतर प्रयास से सपने पूरे किए।


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