सौहार्दं प्रकृतेः शोभा
Class 10 Sanskrit · शेमुषी भाग-2 · Chapter 7
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The story in short
यह कथा एकता, सहयोग और मेल-जोल (सौहार्द) के महत्त्व को दर्शाती है। शीर्षक का अर्थ है — सौहार्द (परस्पर प्रेम और सहयोग) ही प्रकृति की शोभा है। हितोपदेश-शैली की इस कथा में बहुत-से कबूतर (कपोत) एक साथ उड़ रहे होते हैं, तभी वे एक बहेलिये के बिछाए जाल में फँस जाते हैं। घबराने के बजाय उनका बुद्धिमान राजा (चित्रग्रीव) उन्हें सुझाव देता है कि वे सब मिलकर एक साथ ज़ोर लगाकर जाल समेत उड़ जाएँ। एकता और सामूहिक प्रयास से सभी कबूतर जाल को लेकर आकाश में उड़ जाते हैं। फिर वे अपने मित्र चूहे (मूषक) के पास जाते हैं, जो जाल को कुतरकर सबको मुक्त कर देता है। कथा यह सिखाती है कि संगठन और सहयोग में अपार शक्ति है; मिल-जुलकर किया गया प्रयास बड़ी-से-बड़ी विपत्ति को भी दूर कर देता है।


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