मैया मैं नहिं माखन खायो — Class 6 Hindi
मल्हार · Chapter 9
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Chapter summary
The story in steps
- श्रीकृष्ण कहते हैं कि वे माखन नहीं खाते, क्योंकि भोर से ही गायों के पीछे मधुबन भेजे जाते हैं।
- वे बताते हैं कि चार पहर बंसीवट में भटककर साँझ को घर लौटते हैं।
- वे तर्क देते हैं कि वे छोटे बालक हैं, इसलिए छीके तक पहुँचकर माखन नहीं पा सकते।
- वे कहते हैं कि ग्वाल-बाल बैर रखते हैं और जबरदस्ती उनके मुँह पर माखन लगा देते हैं।
- वे माँ को भोली बताकर कहते हैं कि उसने दूसरों की बात मान ली और उन्हें पराया समझ लिया।
- अंत में यशोदा हँस पड़ती हैं और श्रीकृष्ण को हृदय से लगा लेती हैं।
Key ideas & terms
- सूरदास
- ब्रजभाषा के महाकवि, जिन्होंने श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं का मनोहारी वर्णन किया।
- वात्सल्य रस
- बालक के प्रति माता-पिता या बड़ों के स्नेह और दुलार का भाव।
- मधुबन
- मथुरा के पास यमुना के किनारे का एक वन, जहाँ कृष्ण गाय चराने जाते थे।
- छीका
- रस्सियों का बना जाल, जो छत या ऊँची जगह से लटकाया जाता है ताकि उसमें रखी खाने-पीने की चीज़ें सुरक्षित रहें।
- लकुटि-कमरिया
- लाठी और छोटा कंबल (कमली), जिसे लेकर कृष्ण गाय चराने जाते थे।
- ग्वाल-बाल
- गाय पालने वालों के बच्चे अर्थात कृष्ण के संगी-साथी।
शब्दार्थ · Word meanings
- मधुबन
- मथुरा के पास का एक वन
- पहर
- समय की एक इकाई
- बंसीवट
- वह वटवृक्ष जहाँ कृष्ण जाते थे
- बहियन
- बाँहें, हाथ
- छीको
- छत से लटका रस्सी का जाल
- बिधि
- रीति, प्रकार
- ग्वाल-बाल
- गाय पालने वालों के बच्चे
- पतियायो
- विश्वास किया, सच माना
- जिय
- मन, जी
- लकुटि कमरिया
- लाठी और छोटा कंबल
- बिहसिँ
- मुसकाई, हँसी
Extra questions & answers
"मैया मैं नहिं माखन खायो" पद के रचयिता कौन हैं?
इस पद के रचयिता ब्रजभाषा के महाकवि सूरदास हैं।
पद में किस रस की प्रधानता है?
इस पद में वात्सल्य रस की प्रधानता है।
श्रीकृष्ण माँ के आने से पहले कहाँ थे?
वे सुबह से गायों के पीछे मधुबन में और बंसीवट में भटक रहे थे।
"मैं माखन कैसे खा सकता हूँ" — कृष्ण ने क्या तर्क दिया?
कि उनके छोटे-छोटे हाथ ऊँचे टँगे छीके तक पहुँच ही नहीं सकते।
कृष्ण के अनुसार उनके मुँह पर माखन कैसे लगा?
उनके अनुसार ग्वाल-बाल उनसे बैर रखते हैं और उन्होंने ही ज़बरदस्ती उनके मुँह पर माखन लपेट दिया।
कृष्ण माँ को क्या उलाहना देते हैं?
कि माँ बड़ी भोली है और ग्वाल-बालों की बातों पर विश्वास कर लेती है तथा उन्हें पराया समझ रही है।
रूठकर कृष्ण क्या लौटाने की बात करते हैं?
वे अपनी लकुटि और कमरिया (लाठी-कंबल) लौटाने की बात कहते हैं।
यशोदा ने अंत में क्या किया?
बालक के भोले तर्क सुनकर यशोदा मुस्कुराते हुए उन्हें अपने हृदय से लगा लेती हैं।
पद में किस भाषा का प्रयोग हुआ है?
इस पद में ब्रजभाषा का प्रयोग हुआ है।
इस पद की एक काव्यगत विशेषता बताइए।
पद के अंत में कवि ने अपना नाम "सूरदास" दिया है और प्रत्येक पंक्ति में सुंदर तुक मिलता है।
मेरी समझ से
(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा () बनाइए— (1) मैं माखन कैसे खा सकता हूँ? इसके लिए श्रीकृष्ण ने क्या तर्क दिया? • मुझे तुम पराया समझती हो। • मेरी माता, तुम बहुत भोली हो। • मुझे यह लाठी-कंबल नहीं चाहिए। • मेरे छोटे-छोटे हाथ छीके तक कैसे जा सकते हैं?
श्रीकृष्ण ने यह तर्क दिया कि वे अभी बहुत छोटे बालक हैं और उनकी बाँहें छोटी हैं, इसलिए ऊँचे टँगे छीके तक उनका हाथ पहुँच ही नहीं सकता, तो वे माखन कैसे खा सकते हैं। इसी कारण चौथा विकल्प सही उत्तर है।
(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा () बनाइए— (2) श्रीकृष्ण माँ के आने से पहले क्या कर रहे थे? • गाय चरा रहे थे। • माखन खा रहे थे। • मधुबन में भटक रहे थे। • मित्रों के संग खेल रहे थे।
पद के अनुसार श्रीकृष्ण सुबह से शाम तक मधुबन में बंसीवट पर गाय चराने गए थे और शाम को ही घर लौटे थे। इसलिए माँ के आरोप से पहले वे दिन भर गाय चरा रहे थे, ग्वाल-बालों के साथ भटक नहीं रहे थे और माखन नहीं खा रहे थे।
(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
हमने (1) के लिए चौथा उत्तर इसलिए चुना क्योंकि वही श्रीकृष्ण का सीधा तर्क है — छोटे हाथों से छीका न पा सकना। और (2) के लिए पहला उत्तर इसलिए चुना क्योंकि पद की पहली दो पंक्तियाँ बताती हैं कि श्रीकृष्ण भोर से साँझ तक गायों के पीछे मधुबन गए थे, इसलिए वे माखन खाने का समय ही नहीं पा सके। यह तर्क उनकी सफाई को मजबूत बनाता है।
मिलकर करें मिलान
1. जसोदा
यशोदा, श्रीकृष्ण की माँ, जिन्होंने श्रीकृष्ण को पाला था।
2. पहर
समय मापने की एक इकाई (तीन घंटे का एक पहर होता है। एक दिवस में आठ पहर होते हैं)।
3. लकुटि कमरिया
लाठी और छोटा कंबल, कमली (मान्यता है कि श्रीकृष्ण लकुटि-कमरिया लेकर गाय चराने जाया करते थे)।
4. बंसीवट
एक वट वृक्ष (मान्यता है कि श्रीकृष्ण जब गाय चराया करते थे, तब वे इसी वृक्ष के ऊपर चढ़कर वंशी की ध्वनि से गायों को पुकारकर उन्हें एकत्रित करते।)
5. मधुबन
मथुरा के पास यमुना के किनारे का एक वन।
6. छीको
गोल पात्र के आकार का रस्सियों का बना हुआ जाल जो छत या ऊँची जगह से लटकाया जाता है ताकि उसमें रखी हुई खाने-पीने की चीज़ों (जैसे— दूध, दही आदि) को कुत्ते, बिल्ली आदि न पा सकें।
7. माता
जन्म देने वाली, उत्पन्न करने वाली, जननी, माँ।
8. ग्वाल-बाल
गाय पालने वालों के बच्चे, श्रीकृष्ण के संगी साथी।
पंक्तियों पर चर्चा
(क) “भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो”
इस पंक्ति में श्रीकृष्ण माँ से कह रहे हैं कि सुबह होते ही उन्हें गायों के पीछे-पीछे मधुबन भेज दिया गया था। इसका भाव यह है कि वे दिन भर घर से बाहर रहे, इसलिए उन्हें माखन चुराने का अवसर ही नहीं मिला। यह उनकी निर्दोषता का पहला प्रमाण है।
(ख) “सूरदास तब बिहसिँ जसोदा, लै उर कंठ लगायो”
इस पंक्ति में कवि सूरदास कहते हैं कि श्रीकृष्ण की चतुर और भोली-भाली बातें सुनकर माता यशोदा हँस पड़ीं और प्यार से उन्हें गले से लगा लिया। इससे पता चलता है कि माँ को कृष्ण की बात पर विश्वास हो गया और उनका गुस्सा प्रेम में बदल गया।
सोच-विचार के लिए
(क) पद में श्रीकृष्ण ने अपने बारे में क्या-क्या बताया है?
श्रीकृष्ण ने बताया कि वे छोटे बालक हैं, उनकी बाँहें छोटी हैं इसलिए वे छीके तक नहीं पहुँच सकते, वे सुबह से शाम तक चार पहर तक बंसीवट में गाय चराते रहे, ग्वाल-बाल उनसे बैर रखते हैं और उन्होंने जबरदस्ती उनके मुँह पर माखन लपेट दिया है, और वे निर्दोष हैं।
(ख) यशोदा माता ने श्रीकृष्ण को हँसते हुए गले से क्यों लगा लिया?
यशोदा ने देखा कि कृष्ण कितने भोलेपन और चतुराई से तर्क दे रहे हैं, माँ को ही भोली कह रहे हैं और अपनी सफाई दे रहे हैं। उनकी मीठी बातों और निर्दोष चेहरे से माँ का क्रोध दूर हो गया, उन्हें हँसी आ गई और ममता उमड़ने से उन्होंने कृष्ण को गले लगा लिया।
कविता की रचना
(क) इस पाठ को एक बार फिर से पढ़िए और अपने-अपने समूह में मिलकर इस पाठ की विशेषताओं की सूची बनाइए, जैसे इस पद की अंतिम पंक्ति में कवि ने अपना नाम भी दिया है आदि।
इस पद की विशेषताएँ हैं - यह ब्रजभाषा में लिखा गया है, हर पंक्ति के अंत में तुक मिलती है जैसे पठायो-आयो, पायो-लपटायो, इसमें बाल-लीला का मनोहर वर्णन है, श्रीकृष्ण स्वयं प्रथम पुरुष में अपनी सफाई दे रहे हैं, अंतिम पंक्ति में कवि सूरदास ने अपना नाम रखा है जिसे छाप कहते हैं, और भाषा बहुत मधुर व गेय है।
(ख) अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
हम अपनी बनाई सूची कक्षा में पढ़कर सुनाएँगे, दूसरे समूहों की सूचियों को ध्यान से सुनेंगे और मिलकर तय करेंगे कि कौन-कौन सी विशेषताएँ सबसे महत्वपूर्ण हैं, ताकि पद की सुंदरता को सब अच्छी तरह समझ सकें।
अनुमान या कल्पना से
(क) श्रीकृष्ण अपनी माँ यशोदा को तर्क क्यों दे रहे होंगे?
क्योंकि माँ यशोदा ने उन्हें माखन चुराते हुए पकड़ा है या ग्वाल-बालों ने शिकायत की है। कृष्ण डर रहे हैं कि माँ नाराज न हो जाएँ या दंड न दें, इसलिए वे खुद को निर्दोष सिद्ध करने के लिए प्यारे-प्यारे तर्क दे रहे हैं।
(ख) जब माता यशोदा ने श्रीकृष्ण को गले से लगा लिया, तब क्या हुआ होगा?
तब कृष्ण का डर खत्म हो गया होगा, वे खुशी से माँ से लिपट गए होंगे, माँ ने प्यार से उनका मुख पोंछा होगा और ग्वाल-बालों की शरारत समझकर उन्हें माफ कर दिया होगा। घर में फिर हँसी-खुशी का माहौल बन गया होगा।
शब्दों के रूप
(क) “भोर भयो गैयन के पाछे” इस पंक्ति में ‘पाछे’ शब्द आया है। इसके लिए ‘पीछे’ शब्द का उपयोग भी किया जाता है। इस पद में ऐसे कुछ और शब्द हैं जिन्हें आप कुछ अलग रूप में लिखते और बोलते होंगे। नीचे ऐसे ही कुछ अन्य शब्द दिए गए हैं। इन्हें आप जिस रूप में बोलते-लिखते हैं, उस प्रकार से लिखिए। • परे
परे का मानक रूप है - पर या पड़ने पर, जैसे साँझ परे = साँझ पड़ने पर।
(क) “भोर भयो गैयन के पाछे” इस पंक्ति में ‘पाछे’ शब्द आया है। इसके लिए ‘पीछे’ शब्द का उपयोग भी किया जाता है। इस पद में ऐसे कुछ और शब्द हैं जिन्हें आप कुछ अलग रूप में लिखते और बोलते होंगे। नीचे ऐसे ही कुछ अन्य शब्द दिए गए हैं। इन्हें आप जिस रूप में बोलते-लिखते हैं, उस प्रकार से लिखिए। • छोटो
छोटो का मानक रूप है - छोटा।
(क) “भोर भयो गैयन के पाछे” इस पंक्ति में ‘पाछे’ शब्द आया है। इसके लिए ‘पीछे’ शब्द का उपयोग भी किया जाता है। इस पद में ऐसे कुछ और शब्द हैं जिन्हें आप कुछ अलग रूप में लिखते और बोलते होंगे। नीचे ऐसे ही कुछ अन्य शब्द दिए गए हैं। इन्हें आप जिस रूप में बोलते-लिखते हैं, उस प्रकार से लिखिए। • बिधि
बिधि का मानक रूप है - विधि।
(क) “भोर भयो गैयन के पाछे” इस पंक्ति में ‘पाछे’ शब्द आया है। इसके लिए ‘पीछे’ शब्द का उपयोग भी किया जाता है। इस पद में ऐसे कुछ और शब्द हैं जिन्हें आप कुछ अलग रूप में लिखते और बोलते होंगे। नीचे ऐसे ही कुछ अन्य शब्द दिए गए हैं। इन्हें आप जिस रूप में बोलते-लिखते हैं, उस प्रकार से लिखिए। • भोरी
भोरी का मानक रूप है - भोली।
(क) “भोर भयो गैयन के पाछे” इस पंक्ति में ‘पाछे’ शब्द आया है। इसके लिए ‘पीछे’ शब्द का उपयोग भी किया जाता है। इस पद में ऐसे कुछ और शब्द हैं जिन्हें आप कुछ अलग रूप में लिखते और बोलते होंगे। नीचे ऐसे ही कुछ अन्य शब्द दिए गए हैं। इन्हें आप जिस रूप में बोलते-लिखते हैं, उस प्रकार से लिखिए। • कछु
कछु का मानक रूप है - कुछ।
(क) “भोर भयो गैयन के पाछे” इस पंक्ति में ‘पाछे’ शब्द आया है। इसके लिए ‘पीछे’ शब्द का उपयोग भी किया जाता है। इस पद में ऐसे कुछ और शब्द हैं जिन्हें आप कुछ अलग रूप में लिखते और बोलते होंगे। नीचे ऐसे ही कुछ अन्य शब्द दिए गए हैं। इन्हें आप जिस रूप में बोलते-लिखते हैं, उस प्रकार से लिखिए। • लै
लै का मानक रूप है - लेकर या ले।
(क) “भोर भयो गैयन के पाछे” इस पंक्ति में ‘पाछे’ शब्द आया है। इसके लिए ‘पीछे’ शब्द का उपयोग भी किया जाता है। इस पद में ऐसे कुछ और शब्द हैं जिन्हें आप कुछ अलग रूप में लिखते और बोलते होंगे। नीचे ऐसे ही कुछ अन्य शब्द दिए गए हैं। इन्हें आप जिस रूप में बोलते-लिखते हैं, उस प्रकार से लिखिए। • नहिं
नहिं का मानक रूप है - नहीं।
1. उपजि
उपजना, उत्पन्न होना
2. जानि
जानकर, समझकर
3. जायो
जन्मा
4. जिय
मन, जी
5. पठायो
भेज दिया
6. पतियायो
विश्वास किया, सच माना
7. बहियन
बाँह, हाथ, भुजा
8. बिधि
प्रकार, भाँति, रीति
9. बिहसिँ
मुसकाई, हँसी
10. भटक्यो
इधर-उधर घूमा या भटका
11. लपटायो
मला, लगाया, पोता
वर्ण-परिवर्तन
“तू माता मन की अति भोरी” ‘भोरी’ का अर्थ है ‘भोली’। यहाँ ‘ल’ और ‘र’ वर्ण परस्पर बदल गए हैं। आपने ध्यान दिया होगा कि इस पद में कुछ और शब्दों में भी ‘ल’ या ‘ड़’ और ‘र’ में वर्ण-परिवर्तन हुआ है। ऐसे शब्द चुनकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।
पद में वर्ण-परिवर्तन वाले शब्द हैं - परे (पड़े), बंसीवट (बंसीबट), बरबस (बलपूर्वक/बरबस में ल का र), लकुटि (लकड़ी से संबंधित)। मुख्य उदाहरण भोरी-भोली है, वैसे ही कई ब्रजभाषा शब्दों में ल/ड़ को र लिखा गया है।
पंक्ति से पंक्ति
1. भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो।
सुबह होते ही गायों के पीछे मुझे मधुबन भेज दिया।
2. चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो।
चार पहर बंसीवट में भटकने के बाद साँझ होने पर घर आया।
3. मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो।
मैं छोटा बालक हूँ, मेरी बाँहें छोटी हैं, मैं छीके तक कैसे पहुँच सकता हूँ?
4. ग्वाल-बाल सब बैर परे हैं, बरबस मुख लपटायो।
ये सब सखा मुझसे बैर रखते हैं, इन्होंने मक्खन हठपूर्वक मेरे मुख पर लिपटा दिया।
5. तू माता मन की अति भोरी, इनके कहे पतियायो।
माँ तुम मन की बड़ी भोली हो, इनकी बातों में आ गई हो।
6. जिय तेरे कछु भेद उपजि है, जानि परायो जायो।
तेरे हृदय में अवश्य कोई भेद है, जो मुझे पराया समझ लिया।
आपकी बात
“मैया मैं नहिं माखन खायो” यहाँ श्रीकृष्ण अपनी माँ के सामने सिद्ध करने का प्रयास कर रहे हैं कि उन्होंने माखन नहीं खाया है। कभी-कभी हमें दूसरों के सामने सिद्ध करना पड़ जाता है कि यह कार्य हमने नहीं किया। क्या आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ है? कब? किसके सामने? आपने अपनी बात सिद्ध करने के लिए कौन-कौन से तर्क दिए? उस घटना के बारे में बताइए।
हाँ, एक बार मेरे छोटे भाई ने गिलास तोड़ दिया और माँ ने समझा कि मैंने तोड़ा है। मैंने माँ को बताया कि मैं उस समय बाहर खेल रहा था, मेरे हाथ सूखे थे और गिलास रसोई में था जहाँ मैं गया ही नहीं। मैंने भाई से भी पूछने को कहा और अंत में भाई ने सच बता दिया। इससे माँ ने मुझे माफ कर दिया।
घर की वस्तुएँ
“मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो।” ‘छीका’ घर की एक ऐसी वस्तु है जिसे सैकड़ों-वर्ष से भारत में उपयोग में लाया जा रहा है। नीचे कुछ और घरेलू वस्तुओं के चित्र दिए गए हैं। इन्हें आपके घर में क्या कहते हैं? चित्रों के नीचे लिखिए। यदि किसी चित्र को पहचानने में कठिनाई हो तो आप अपने शिक्षक, परिजनों या इंटरनेट की सहायता भी ले सकते हैं।
चित्रों में दिखने वाली वस्तुएँ हैं - मटका/घड़ा, अँगीठी/चूल्हा, चौकी/पटरा, सिलाई मशीन, खाट/चारपाई, बरनी/मर्तबान, सूप/छाज, सिलबट्टा, साथ ही रजाई रखने की पिटारी, हाथ का पंखा, मूसल, और मधानी/रई। हर घर में इन्हें स्थानीय भाषा में मटका, चूल्हा, चौकी, मशीन, खाट, बरनी, सूप और सिलबट्टा ही कहा जाता है।
आप जानते ही हैं कि श्रीकृष्ण को मक्खन बहुत पसंद था। दूध से दही, मक्खन बनाया जाता है और मक्खन से घी बनाया जाता है। नीचे दूध से घी बनाने की प्रक्रिया संबंधी कुछ चित्र दिए गए हैं। अपने परिवार के सदस्यों, शिक्षकों या इंटरनेट आदि की सहायता से दूध से घी बनाने की प्रक्रिया लिखिए।
दूध से घी बनाने की प्रक्रिया: पहले ताजा दूध को गर्म करके ठंडा किया जाता है और उसमें थोड़ा दही का जामन डालकर दही जमाया जाता है। फिर दही को मधानी से बिलोकर मक्खन निकाला जाता है। मक्खन को साफ पानी से धोकर इकट्ठा किया जाता है। फिर मक्खन को धीमी आँच पर कड़ाही में गर्म किया जाता है, तब वह पिघलकर घी बन जाता है और नीचे मावा बचता है। ठंडा होने पर घी को छानकर बरनी में भर लिया जाता है।
समय का माप
(क) ‘पहर’ और ‘साँझ’ शब्दों का प्रयोग समय बताने के लिए किया जाता है। समय बताने के लिए और कौन-कौन से शब्दों का प्रयोग किया जाता है? अपने समूह में मिलकर सूची बनाइए और कक्षा में साझा कीजिए। (संकेत— कल, ऋतु, वर्ष, अब, पखवाड़ा, दशक, वेला, अवधि आदि)
समय बताने वाले अन्य शब्द हैं - सेकंड, मिनट, घंटा, पहर, सुबह, दोपहर, शाम, रात, दिन, सप्ताह, पखवाड़ा, महीना, वर्ष, दशक, शताब्दी, आज, कल, परसों, अभी, ऋतु, वेला और अवधि। हम इनकी सूची बनाकर कक्षा में साझा करेंगे।
(ख) श्रीकृष्ण के अनुसार वे कितने घंटे गाय चराते थे?
श्रीकृष्ण कहते हैं वे चार पहर भटके। एक पहर
(ग) मान लीजिए वे शाम को छह बजे गाय चराकर लौटे। वे सुबह कितने बजे गाय चराने के लिए घर से निकले होंगे?
यदि वे शाम
(घ) ‘दोपहर’ का अर्थ है ‘दो पहर’ का समय। जब दूसरे पहर की समाप्ति होती है और तीसरे पहर का प्रारंभ होता है। यह लगभग 12 बजे का समय होता है, जब सूर्य सिर पर आ जाता है। बताइए दिन के पहले पहर का प्रारंभ लगभग कितने बजे होगा?
दोपहर
हम सब विशेष हैं
(क) महाकवि सूरदास दृष्टिबाधित थे। उनकी विशेष क्षमता थी उनकी कल्पना शक्ति और कविता रचने की कुशलता। हम सभी में कुछ न कुछ ऐसा होता है जो हमें सबसे विशेष और सबसे भिन्न बनाता है। नीचे दिए गए व्यक्तियों की विशेष क्षमताएँ क्या हैं, विचार कीजिए और लिखिए— आपकी
मेरी विशेष क्षमता चित्र बनाना और कहानियाँ लिखना है। मैं कल्पना से नए चित्र बना लेता हूँ।
(क) महाकवि सूरदास दृष्टिबाधित थे। उनकी विशेष क्षमता थी उनकी कल्पना शक्ति और कविता रचने की कुशलता। हम सभी में कुछ न कुछ ऐसा होता है जो हमें सबसे विशेष और सबसे भिन्न बनाता है। नीचे दिए गए व्यक्तियों की विशेष क्षमताएँ क्या हैं, विचार कीजिए और लिखिए— आपके किसी परिजन की
मेरी माँ की विशेष क्षमता स्वादिष्ट खाना बनाना और सबका ध्यान रखना है।
(क) महाकवि सूरदास दृष्टिबाधित थे। उनकी विशेष क्षमता थी उनकी कल्पना शक्ति और कविता रचने की कुशलता। हम सभी में कुछ न कुछ ऐसा होता है जो हमें सबसे विशेष और सबसे भिन्न बनाता है। नीचे दिए गए व्यक्तियों की विशेष क्षमताएँ क्या हैं, विचार कीजिए और लिखिए— आपके शिक्षक की
मेरे शिक्षक की विशेष क्षमता कठिन बात को सरल उदाहरण से समझाना और सबको प्रेरित करना है।
(क) महाकवि सूरदास दृष्टिबाधित थे। उनकी विशेष क्षमता थी उनकी कल्पना शक्ति और कविता रचने की कुशलता। हम सभी में कुछ न कुछ ऐसा होता है जो हमें सबसे विशेष और सबसे भिन्न बनाता है। नीचे दिए गए व्यक्तियों की विशेष क्षमताएँ क्या हैं, विचार कीजिए और लिखिए— आपके मित्र की
मेरे मित्र की विशेष क्षमता तेज दौड़ना और गणित के सवाल जल्दी हल करना है।
(ख) एक विशेष क्षमता ऐसी भी है जो हम सबके पास होती है। वह क्षमता है सबकी सहायता करना, सबके भले के लिए सोचना। तो बताइए, इस क्षमता का उपयोग करके आप इनकी सहायता कैसे करेंगे— एक सहपाठी पढ़ना जानता है और उसे एक पाठ समझ में नहीं आ रहा है।
मैं उसे पाठ धीरे-धीरे समझाऊँगा, कठिन शब्दों के अर्थ बताऊँगा और उदाहरण देकर अभ्यास कराऊँगा।
(ख) एक विशेष क्षमता ऐसी भी है जो हम सबके पास होती है। वह क्षमता है सबकी सहायता करना, सबके भले के लिए सोचना। तो बताइए, इस क्षमता का उपयोग करके आप इनकी सहायता कैसे करेंगे— एक सहपाठी को पढ़ना अच्छा लगता है और वह देख नहीं सकता।
मैं उसे पाठ पढ़कर सुनाऊँगा और ब्रेल किताब या ऑडियो की व्यवस्था करने में मदद करूँगा।
(ख) एक विशेष क्षमता ऐसी भी है जो हम सबके पास होती है। वह क्षमता है सबकी सहायता करना, सबके भले के लिए सोचना। तो बताइए, इस क्षमता का उपयोग करके आप इनकी सहायता कैसे करेंगे— एक सहपाठी बहुत जल्दी-जल्दी बोलता है और उसे कक्षा में भाषण देना है।
मैं उसे धीरे-धीरे बोलने का अभ्यास कराऊँगा, साँस लेने और विराम देने की तरकीब सिखाऊँगा और सामने अभ्यास करवाऊँगा।
(ख) एक विशेष क्षमता ऐसी भी है जो हम सबके पास होती है। वह क्षमता है सबकी सहायता करना, सबके भले के लिए सोचना। तो बताइए, इस क्षमता का उपयोग करके आप इनकी सहायता कैसे करेंगे— एक सहपाठी बहुत अटक-अटक कर बोलता है और उसे कक्षा में भाषण देना है।
मैं उसे हौसला दूँगा, छोटे-छोटे वाक्यों में अभ्यास कराऊँगा और कहूँगा कि घबराए नहीं, धीरे-धीरे आत्मविश्वास बढ़ेगा।
(ख) एक विशेष क्षमता ऐसी भी है जो हम सबके पास होती है। वह क्षमता है सबकी सहायता करना, सबके भले के लिए सोचना। तो बताइए, इस क्षमता का उपयोग करके आप इनकी सहायता कैसे करेंगे— एक सहपाठी को चलने में कठिनाई है और वह सबके साथ दौड़ना चाहता है।
मैं उसके साथ चलूँगा, उसकी गति के अनुसार खेल को बदलेंगे और व्हीलचेयर या सहारे की व्यवस्था में मदद करूँगा ताकि वह भी शामिल हो सके।
(ख) एक विशेष क्षमता ऐसी भी है जो हम सबके पास होती है। वह क्षमता है सबकी सहायता करना, सबके भले के लिए सोचना। तो बताइए, इस क्षमता का उपयोग करके आप इनकी सहायता कैसे करेंगे— एक सहपाठी प्रतिदिन विद्यालय आता है और उसे सुनने में कठिनाई है।
मैं उसके सामने स्पष्ट रूप से बोलूँगा, लिखकर समझाऊँगा, सांकेतिक भाषा सीखने में मदद करूँगा और शिक्षक को भी उसकी जरूरत बताऊँगा।
आज की पहेली
दूध से मक्खन ही नहीं बल्कि और भी बहुत कुछ बनाया जाता है। नीचे दूध से बनने वाली कुछ वस्तुओं के चित्र दिए गए हैं। दी गई शब्द-पहेली में उनके नाम के पहले अक्षर दे दिए गए हैं। नाम पूरे कीजिए— खो द म ल प छा मि घी श आ
दूध से बनने वाली वस्तुएँ हैं - खोया, दही, मक्खन, लस्सी, पनीर, छाछ, मिठाई, घी, श्रीखंड, आइसक्रीम। पहेली में दिए पहले अक्षरों से यही नाम पूरे होते हैं।
खोजबीन के लिए
सूरदास द्वारा रचित कुछ अन्य रचनाएँ खोजें व पढ़ें।
सूरदास की अन्य प्रसिद्ध रचनाएँ हैं - सूरसागर, साहित्य लहरी और सूर सारावली। इनमें कृष्ण की बाल-लीलाओं के कई सुंदर पद हैं जैसे ‘जसोदा हरि पालने झुलावै’ और ‘मैया मोहि दाऊ बहुत खिझायो’। हम इन्हें पुस्तकालय या इंटरनेट से खोजकर पढ़ सकते हैं।


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