रहीम के दोहे — Class 6 Hindi
मल्हार · Chapter 5
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Chapter summary
Key ideas & terms
- रहीम
- भक्तिकाल के प्रसिद्ध नीति-कवि अब्दुर्रहीम खानखाना, जिन्होंने अवधी और ब्रजभाषा में दोहे रचे।
- दोहा
- दो पंक्तियों का एक मात्रिक छंद, जिसमें संक्षेप में गहरी बात कही जाती है।
- कसौटी
- परख या जाँच; वह काला पत्थर जिस पर सोना घिसकर परखा जाता है।
- सुजान
- चतुर, बुद्धिमान और समझदार व्यक्ति।
- पानी (शब्द एक अर्थ अनेक)
- इस दोहे में पानी के तीन अर्थ हैं — सम्मान, जल और चमक।
- नीति-दोहे
- जीवन और व्यवहार की सीख देने वाले दोहे।
Extra questions & answers
रहीम के दोहे किस काल के हैं?
ये दोहे भक्तिकाल के कवि अब्दुर्रहीम खानखाना (रहीम) के हैं।
"बड़े को देखकर छोटे को न त्यागो" वाले दोहे का भाव क्या है?
कि हर छोटी-बड़ी वस्तु का अपना महत्व होता है; जहाँ सुई काम आती है वहाँ तलवार कुछ नहीं कर सकती।
पेड़ और सरोवर के उदाहरण से रहीम क्या सिखाते हैं?
कि जैसे पेड़ अपने फल और सरोवर अपना जल स्वयं नहीं भोगते, वैसे ही सज्जन परोपकार के लिए धन संचित करते हैं।
प्रेम के धागे के विषय में रहीम क्या कहते हैं?
कि प्रेम का धागा झटके से नहीं तोड़ना चाहिए, क्योंकि टूटने पर जुड़ने पर भी गाँठ पड़ जाती है।
"रहिमन पानी राखिये" दोहे में पानी के कौन-कौन से अर्थ हैं?
इस दोहे में पानी के तीन अर्थ हैं — सम्मान, जल और चमक।
थोड़े दिन की विपत्ति को रहीम अच्छा क्यों मानते हैं?
क्योंकि विपत्ति में ही हित और अहित करने वालों की सच्ची पहचान हो जाती है।
जीभ और सिर वाले दोहे का संदेश क्या है?
कि सोच-समझकर बोलना चाहिए, क्योंकि जीभ की कही बात का दंड बेचारे सिर को भुगतना पड़ता है।
सच्चे मित्र की पहचान रहीम कैसे बताते हैं?
सच्चा मित्र वही है जो विपत्ति की कसौटी पर खरा उतरे; संपत्ति में तो बहुत मित्र बन जाते हैं।
"जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तलवारि" का आशय क्या है?
कि हर वस्तु की अपनी-अपनी उपयोगिता है; सिलाई का काम सुई ही कर सकती है, तलवार नहीं।
रहीम के दोहों की भाषा कैसी है?
सरल, सजीव और लोक में प्रचलित अवधी-ब्रजभाषा, जिसके कारण ये आज भी लोकप्रिय हैं।


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