गोल — Class 6 Hindi
मल्हार · Chapter 2
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Chapter summary
यह पाठ हॉकी के महान खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद के संस्मरण का एक अंश है, जिसे "गोल" शीर्षक दिया गया है। ध्यानचंद बताते हैं कि उनका जन्म सन 1905 में प्रयाग में एक साधारण परिवार में हुआ और बाद में परिवार झाँसी आ बसा। सोलह वर्ष की आयु में वे सेना में साधारण सिपाही बने, जहाँ सूबेदार मेजर तिवारी के प्रोत्साहन से उन्होंने हॉकी खेलना सीखा। पाठ में एक रोचक घटना है — एक मैच में विरोधी खिलाड़ी ने गुस्से में आकर उनके सिर पर हॉकी स्टिक दे मारी। पट्टी बँधवाकर लौटे ध्यानचंद ने बदला लेने की बात कही, पर बदला यह था कि उन्होंने एक के बाद एक छह गोल कर दिए और फिर उसी खिलाड़ी को समझाया कि खेल में इतना गुस्सा अच्छा नहीं। 1936 के बर्लिन ओलंपिक में उन्हें कप्तान बनाया गया और उनकी खेल-कुशलता देखकर लोगों ने उन्हें "हॉकी का जादूगर" कहा। उनकी सदा यही कोशिश रहती कि गेंद को गोल के पास ले जाकर साथी को गोल का श्रेय दें। उनकी सफलता का रहस्य था — लगन, साधना और खेल भावना। पाठ खेल-भावना, सहयोग और विनम्रता का संदेश देता है।
मेजर ध्यानचंदहॉकीखेल भावनाबर्लिन ओलंपिकसंस्मरण-विधा
Key ideas & terms
- मेजर ध्यानचंद
- भारत के महान हॉकी खिलाड़ी, जिन्हें "हॉकी का जादूगर" कहा जाता है; इन्हीं का संस्मरण इस पाठ में है।
- संस्मरण
- अपनी पुरानी यादों या बीते अनुभवों को लिखने की गद्य-विधा।
- बर्लिन ओलंपिक
- सन 1936 में जर्मनी के बर्लिन शहर में आयोजित ओलंपिक खेल, जहाँ भारत को हॉकी में स्वर्ण पदक मिला।
- खेल भावना
- हार-जीत को समान भाव से लेना तथा प्रतिद्वंद्वी के प्रति सम्मान और सहयोग का भाव।
- हॉकी का जादूगर
- ध्यानचंद की अद्भुत खेल-कुशलता के कारण लोगों द्वारा दी गई उपाधि।
- राष्ट्रीय खेल दिवस
- ध्यानचंद के जन्मदिन (29 अगस्त) को भारत में मनाया जाने वाला दिवस।
Extra questions & answers
"गोल" पाठ किसके जीवन से संबंधित है?
यह पाठ महान हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद के संस्मरण का अंश है।
ध्यानचंद का जन्म कब और कहाँ हुआ?
उनका जन्म सन 1905 में प्रयाग में एक साधारण परिवार में हुआ था।
ध्यानचंद ने हॉकी खेलना कैसे आरंभ किया?
सेना में भर्ती होने के बाद सूबेदार मेजर तिवारी के बार-बार प्रोत्साहन से उन्होंने हॉकी खेलना शुरू किया।
लोगों ने ध्यानचंद को "हॉकी का जादूगर" क्यों कहा?
उनके हॉकी खेलने के विशेष कौशल और अद्भुत खेल-शैली के कारण।
मैच में चोट लगने के बाद ध्यानचंद ने क्या "बदला" लिया?
उन्होंने एक के बाद एक छह गोल कर दिए और खेल जीतकर अपना बदला लिया।
ध्यानचंद की खेल भावना किस बात से प्रकट होती है?
वे गेंद को गोल के पास ले जाकर अपने साथी को गोल करने का श्रेय देना चाहते थे।
1936 के बर्लिन ओलंपिक में भारत को क्या मिला?
भारतीय हॉकी टीम ने स्वर्ण पदक जीता और ध्यानचंद उसके कप्तान थे।
ध्यानचंद के अनुसार सफलता के सबसे बड़े मंत्र क्या हैं?
लगन, साधना और खेल भावना ही सफलता के सबसे बड़े मंत्र हैं।
"बुरा काम करने वाला आदमी हर समय डरता रहता है" — इसका आशय क्या है?
जो दूसरों के साथ बुराई करता है, उसे सदा यह भय रहता है कि उसके साथ भी वैसा ही व्यवहार होगा।
पाठ हमें क्या संदेश देता है?
खेल को सही भावना से खेलना चाहिए, विनम्र रहना चाहिए और सहयोग एवं लगन से सफलता मिलती है।


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